OBC Advocates Welfare Association ने राष्ट्रपति को भेजा पत्र
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर OBC Advocates Welfare Association ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर सामाजिक विविधता के आधार पर नियुक्तियों की मांग की है। एसोसिएशन ने हाल ही में कॉलेजियम की ओर से अनुशंसित नामों पर पुनर्विचार करने और SC, ST तथा OBC वर्ग के योग्य अधिवक्ताओं को भी हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्ति का अवसर देने की मांग की है। एसोसिएशन ने पत्र की प्रतियां चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को भी भेजी हैं।
कॉलेजियम की सिफारिश में सामाजिक विविधता नहीं होने का आरोप
एसोसिएशन का दावा है कि हाल ही में कॉलेजियम की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए एक ही सामाजिक वर्ग के 8 अधिवक्ताओं के नामों की अनुशंसा की गई है। एसोसिएशन के अनुसार इन अनुशंसित नामों में OBC, SC, ST, अल्पसंख्यक वर्ग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं है। एसोसिएशन ने इसे न्यायपालिका में सामाजिक विविधता और समान प्रतिनिधित्व के दृष्टिकोण से गंभीर मुद्दा बताया है। एसोसिएशन ने राष्ट्रपति से मांग की है कि अनुशंसित नामों पर पुनर्विचार करते हुए विभिन्न सामाजिक वर्गों के योग्य उम्मीदवारों को भी नियुक्ति प्रक्रिया में उचित अवसर दिया जाए।
OBC की आबादी 51 फीसदी से अधिक होने का दावा
एसोसिएशन ने पत्र में मध्य प्रदेश की सामाजिक संरचना का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि राज्य में OBC की आबादी 51 फीसदी से अधिक है। पत्र के अनुसार अनुसूचित जाति की आबादी करीब 16 फीसदी, अनुसूचित जनजाति की करीब 21 फीसदी, अल्पसंख्यकों की करीब 10 फीसदी और महिलाओं की आबादी लगभग 49 फीसदी है। एसोसिएशन का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी वाले सामाजिक समूहों का हाईकोर्ट की न्यायिक संरचना में पर्याप्त प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
हाईकोर्ट के मौजूदा जजों में भी प्रतिनिधित्व का मुद्दा
एसोसिएशन ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वर्तमान में भी OBC, SC, ST, अल्पसंख्यक और महिलाओं को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। पत्र में कहा गया है कि न्यायपालिका में सामाजिक विविधता का होना समाज के विभिन्न वर्गों में न्यायिक संस्थाओं के प्रति विश्वास को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
MP हाईकोर्ट में 15 पद रिक्त होने का दावा
एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के स्वीकृत और रिक्त पदों की स्थिति का भी उल्लेख किया है। पत्र के अनुसार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों के कुल 53 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 40 स्थायी और 13 अतिरिक्त पद शामिल हैं। इनमें से 38 पद भरे हुए हैं, जबकि 15 पद रिक्त हैं। एसोसिएशन का कहना है कि इतनी संख्या में पद रिक्त होने के बावजूद नियुक्तियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व और संतुलन का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
राष्ट्रपति, CJI और कानून मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग
OBC Advocates Welfare Association ने राष्ट्रपति से कॉलेजियम की अनुशंसाओं पर पुनर्विचार की मांग की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय से भी इस विषय पर विचार करने का आग्रह किया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के दौरान योग्यता के साथ-साथ सामाजिक विविधता और व्यापक प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
