लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
रिटायर्ड महिला सब इंस्पेक्टर के वेतन से की गई 17 लाख रुपए की कटौती की राशि वापस नहीं करने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने राज्य के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, तत्कालीन भोपाल एसपी ममतेश माली और पेंशन अधिकारी शोभा भाकरिया को सशर्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के वेतन से काटी गई राशि चार सप्ताह के भीतर वापस नहीं की गई, तो 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
रिटायरमेंट के बाद वेतन से 17 लाख की वसूली
यह मामला भोपाल की रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर लजवर खानम की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता 30 अप्रैल 2016 को पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुई थीं। याचिका के अनुसार उनके वेतन से करीब 17 लाख रुपए की वसूली करने के निर्देश जारी किए गए थे। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
11 मई 2024 को हाईकोर्ट ने राशि लौटाने का दिया था आदेश
मामले में हाईकोर्ट ने 11 मई 2024 को फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता के वेतन से काटी गई पूरी राशि वापस करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद अब तक राशि वापस नहीं की गई। आदेश का पालन नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अतुल कुमार राय ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
सरकार ने कहा- रिव्यू याचिका लंबित है
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील 12 फरवरी 2026 को खारिज हो चुकी है। हालांकि, सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। इस पर जस्टिस विवेक जैन ने रिकॉर्ड देखने के बाद स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट के आदेश पर कोई स्टे नहीं दिया गया है।
सिर्फ रिव्यू लंबित होने से आदेश की अवहेलना नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पुनर्विचार याचिका लंबित होने के आधार पर हाईकोर्ट के आदेश का पालन टाला नहीं जा सकता। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन सुनिश्चित करने के सशर्त निर्देश दिए हैं।
पालन नहीं हुआ तो अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चार सप्ताह के भीतर रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर को उनकी कटौती की राशि वापस नहीं की गई, तो 28 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में संबंधित अनावेदकों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। इस आदेश के साथ कोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी है।
