कोविड काल के दौरान प्रोविजनल रसीद से केस दाखिल करने का मामला
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
कोविड-19 महामारी के दौरान वर्ष 2020-2021 में मुकदमों में जमा की जाने वाली कोर्ट फीस को लेकर कथित अनियमितताओं के मामले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। सोमवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले की प्रशासनिक स्तर पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में रजिस्ट्री कार्यालय को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
यह मामला ग्वालियर में एडवोकेट क्लर्क के रूप में कार्यरत मनोज पाल की ओर से दायर जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष उठाया गया है।
प्रोविजनल एप्लीकेशन रसीद से केस दाखिल करने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोविड काल के दौरान कुछ मामलों में निर्धारित कोर्ट फीस की वैध रसीद के स्थान पर प्रोविजनल एप्लीकेशन रसीद लगाकर न्यायालय में प्रकरण दाखिल किए गए। याचिकाकर्ता का दावा है कि कुछ अधिवक्ताओं ने वैध और सिस्टम से जनरेटेड कोर्ट फीस रसीद के बजाय प्रोविजनल रसीद का इस्तेमाल किया। इन रसीदों को कथित तौर पर कोर्ट फीस के भुगतान के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया। याचिका में इस प्रक्रिया को अवैधानिक बताते हुए कोविड काल में दाखिल किए गए संबंधित मामलों की जांच की मांग की गई है।
सरकारी राजस्व को नुकसान की आशंका
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा है कि यदि प्रोविजनल रसीदों को कोर्ट फीस भुगतान का वैध प्रमाण मानकर स्वीकार किया गया, तो इससे न्यायिक एवं सरकारी राजस्व को नुकसान हो सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की कथित अनियमितता केवल राजस्व से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा
याचिकाकर्ता के अनुसार उसने कथित अनियमितताओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया था। याचिका में अभ्यावेदन की प्रति Annexure P/1 के रूप में संलग्न की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि शिकायत और अभ्यावेदन दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने जनहित में हाईकोर्ट का रुख किया।
कोविड काल के मामलों की जांच की मांग
PIL में मांग की गई है कि वर्ष 2020-2021 के दौरान प्रोविजनल एप्लीकेशन रसीदों के आधार पर दाखिल किए गए मामलों की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि संबंधित मामलों में निर्धारित कोर्ट फीस का वास्तविक भुगतान हुआ था या नहीं। याचिकाकर्ता ने न्यायिक राजस्व की सुरक्षा के साथ-साथ भविष्य में ऐसी कथित अनियमितताओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की भी मांग की है।
हाईकोर्ट रजिस्ट्री करेगी प्रशासनिक जांच
मामले की सोमवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई में याचिकाकर्ता ने स्वयं अपना पक्ष रखा। दलीलों को सुनने के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले की प्रशासनिक स्तर पर जांच कराने के निर्देश दिए। इसके लिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्री कार्यालय को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जांच की प्रक्रिया के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। डिवीजन बेंच ने निर्देश जारी करने के बाद मामले की सुनवाई स्थगित (मुल्तवी) कर दी।
न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता का महत्वपूर्ण मामला
कोविड-19 के दौरान न्यायालयों में ऑनलाइन और डिजिटल प्रक्रियाओं का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ था। ऐसे समय में कोर्ट फीस के भुगतान से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच का मामला न्यायिक प्रशासन और राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होगा कि प्रोविजनल एप्लीकेशन रसीदों के आधार पर कितने मामले दाखिल हुए, उनमें निर्धारित कोर्ट फीस का भुगतान हुआ था या नहीं और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
