फर्जी ई-ट्रांजिट से जुड़े मामले में हुआ था मेंशनिंग की सुविधा का दुरूपयोग
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगरौली में रेत के अवैध परिवहन और फर्जी ई-ट्रांजिट पास से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में सुनवाई के दौरान वकीलों द्वारा 'मेंशनिंग' (शीघ्र सुनवाई के लिए मामला उल्लेखित करने) की सुविधा के दुरुपयोग पर गहरी नाराजगी जताई है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीज़न बेंच ने इसे न्याय प्रशासन के साथ खिलवाड़ मानते हुए मामले में सख्त रुख अपनाया है और प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) को सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।
यह जनहित याचिका सीधी जिले के ग्राम दौरा निवासी मनीष सिंह की ओर से वर्ष 2025 में दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि मुंबई की में. सहकार ग्लोबल द्वारा उनके वाहन के नाम पर फर्जी ई-ट्रांजिट पास जारी किए गए। याचिका में मांग की गई थी कि शहडोल कलेक्टर को निर्देश दिए जाएं कि वह फर्जी ई-ट्रांजिट पास के संबंध में कंपनी के खिलाफ तुरंत जांच बैठाएं। साथ ही कंपनी को दिए गए अनुबंध (contract) को समाप्त किया जाए।
सुनवाई टालने के लिए 'मेंशनिंग' के दुरुपयोग का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रवि नंदन सिंह ने कोर्ट का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि सहकार ग्लोबल कंपनी के वकील (श्री शोएब खान) द्वारा बार-बार मेंशनिंग कराकर मामले की सुनवाई को जानबूझकर टाला जा रहा है। आरोप लगाया गया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि इस बीच सिंगरौली क्षेत्र में पड़ी रेत को वहां से हटाया जा सके और रेत हटने के बाद यह याचिका स्वतः निष्प्रभावी (infructuous) हो जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सिंह ने इसे न्यायिक व्यवस्था और न्याय प्रशासन के साथ एक गंभीर धोखाधड़ी (fraud) करार दिया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से:वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह, अधिवक्ता आदित्य वीर सिंह, राज्य शासन की ओर से: उप महाधिवक्ता (Deputy Advocate General) अभिजीत अवस्थी, में. सहकार ग्लोबल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ, अधिवक्ता सुयश व्यास और माइनिंग कारपोरेशन की ओर से अधिवक्ता अर्पित अग्रवाल और अक्षरा लखेरा ने दलीलें रखीं।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया
1. मेंशनिंग सुविधा का दुरुपयोग नहीं होगा बर्दाश्त: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामलों की जल्द सुनवाई के लिए 'मेंशनिंग' की सुविधा इसलिए दी जाती है ताकि किसी अपरिहार्य क्षति से बचा जा सके। लेकिन यदि इस अच्छी परंपरा का उपयोग विरोधी पक्ष को पछाड़ने या सुनवाई में बाधा डालने के लिए किया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
2. प्रिंसिपल रजिस्ट्रार करेंगे जांच: अदालत ने प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता के वकील द्वारा लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच करें और सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करें।
3. यथास्थिति (Status Quo) बरकरार: मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को तय की गई है। न्यायिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आदेश दिया है कि अगली तारीख तक दोनों पक्ष सिंगरौली में मौजूदा स्थिति पर status quo (यथार्थस्थिति) बनाए रखेंगे, यानी वहां कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा।
