LAW'S VERDICT

भोपाल बड़ा तालाब किनारे बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट गंभीर, कहा- Life & Liberty से जुड़ा मामला, NGT जल्द करे सुनवाई

सुनवाई का मौका दिए बिना प्रशासन द्वारा 3 घरों को ढहाने का मामला 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

भोपाल के बड़ा तालाब से लगी जमीन पर जिला प्रशासन की ओर से की जा रही बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ताओं को मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के समक्ष प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने NGT के न्यायिक एवं प्रशासनिक सदस्य से आग्रह किया है कि यदि याचिकाकर्ता मंगलवार को इस मामले में आवेदन दाखिल करते हैं तो उस पर शीघ्र सुनवाई की जाए। हाईकोर्ट ने इसके पीछे वजह बताते हुए कहा कि मामला लोगों के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार से सीधे जुड़ा हुआ है।

50 मीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने का मामला

हाईकोर्ट में यह याचिका भोपाल के भदभदा चौराहे स्थित प्रेमपुरा निवासी निसार खान, मोहसिन और एजाज खान की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार बड़ा तालाब से 50 मीटर के दायरे में मौजूद अतिक्रमणों को हटाने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश NGT ने भोपाल जिला प्रशासन को दिए थे। NGT ने 117 अतिक्रमण हटाकर 31 अगस्त तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से याचिकाकर्ताओं को भी बेदखली का नोटिस जारी कर दिया गया। इसी नोटिस को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

याचिकाकर्ताओं का दावा- संपत्ति 50 मीटर के दायरे से बाहर

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि वे जन्म से ही संबंधित संपत्ति पर रह रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि उनकी संपत्ति बड़ा तालाब से निर्धारित 50 मीटर के दायरे से बाहर है। याचिकाकर्ताओं ने अपने दावे के समर्थन में Google Maps के प्रमाण का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि उपलब्ध मैप से यह स्पष्ट होता है कि उनकी संपत्ति 50 मीटर की सीमा से बाहर स्थित है।

NGT की कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार अग्रवाल ने डिवीजन बेंच के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल 50 मीटर के दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता NGT के समक्ष चल रही मूल कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे। ऐसे में उनका पक्ष सुने बिना संपत्ति से बेदखल करने की कार्रवाई किया जाना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने NGT जाने की दी स्वतंत्रता

याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उन्हें संबंधित मामले को NGT के समक्ष प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी और हाईकोर्ट में दायर याचिका का निराकरण कर दिया। हाईकोर्ट ने साथ ही NGT के न्यायिक एवं प्रशासनिक सदस्यों से अनुरोध किया कि यदि याचिकाकर्ता मंगलवार को आवेदन प्रस्तुत करते हैं तो मामले की गंभीरता को देखते हुए उस पर जल्द सुनवाई की जाए।

जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा मामला

हाईकोर्ट की टिप्पणी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत ने इस तथ्य को ध्यान में रखा कि प्रशासन की प्रस्तावित बेदखली की कार्रवाई सीधे लोगों के रहने और उनके जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। अब याचिकाकर्ताओं की ओर से NGT में आवेदन पेश किए जाने के बाद वहां होने वाली सुनवाई पर मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी।



हाईकोर्ट का आदेश देखें       WP-34778-2026

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