लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, नई दिल्ली।
फर्जी मोटर दुर्घटना बीमा दावों के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्यों को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने खास तौर पर उस कथित पैटर्न पर चिंता जताई, जिसमें एक ही वाहन को अलग-अलग दुर्घटनाओं में शामिल दिखाकर बार-बार बीमा दावा किए जाने की बात सामने आई है। अदालत ने इसे बड़े पैमाने पर होने वाली धोखाधड़ी का संकेत माना है।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्न बी. वराले की पीठ ने 17 अगस्त 2026 के आदेश में कार्यवाही का दायरा बढ़ाते हुए इसे देशभर में संभावित फर्जी मोटर बीमा दावों की जांच तक विस्तारित किया। मामला The Oriental Insurance Co. Ltd. v. Tuni Pati & Ors. से संबंधित है।
सभी राज्यों में बनेगी विशेष SIT
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे संभावित फर्जी बीमा दावों की शिकायतों की जांच के लिए dedicated State-level SIT गठित करें। बीमा कंपनियों को ऐसे सभी मामलों की जानकारी संबंधित राज्य की SIT को भेजनी होगी, जिनमें धोखाधड़ी की आशंका हो। SIT को शिकायतों की शीघ्र जांच करने और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यों को जांच की प्रक्रिया की जानकारी भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
बीमा कंपनियां नहीं अपना सकेंगी 'Pick and Choose' नीति
कोर्ट ने बीमा कंपनियों को स्पष्ट किया है कि संभावित फर्जी दावों को चुन-चुनकर SIT के पास भेजने की अनुमति नहीं होगी। सभी ऐसे दावे जिनमें धोखाधड़ी के संकेत हों, संबंधित SIT को भेजने होंगे। यदि किसी बीमा कंपनी द्वारा मामलों को चुनिंदा तरीके से रेफर करने की बात सामने आती है, तो उसके शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही तय की जा सकती है।
Fraud या Collusion में खारिज दावे भी SIT को भेजने होंगे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि Motor Accident Claims Tribunal (MACT) किसी दावे को धोखाधड़ी या मिलीभगत के आधार पर खारिज करता है, तो संबंधित बीमा कंपनी को उस मामले का विवरण तत्काल संबंधित राज्य की SIT को देना होगा। इसके साथ ही बीमा कंपनी को अपनी ओर से in-house investigation भी करनी होगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके किसी अधिकारी की संभावित मिलीभगत तो नहीं थी। यदि कंपनी के किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ आवश्यक विभागीय कार्रवाई करने की दिशा में भी कदम उठाना होगा।
एक ही वाहन से बार-बार दावे पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
मामला मूल रूप से इस सवाल से शुरू हुआ था कि जिस वाहन को दुर्घटना में शामिल बताया गया, क्या वास्तव में वही वाहन दुर्घटना में शामिल था। कार्यवाही आगे बढ़ने पर अदालत के सामने ऐसे मामलों का पैटर्न सामने आया, जिसमें एक ही वाहन को कई अलग-अलग दुर्घटनाओं में शामिल बताया गया। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को व्यापक बनाते हुए संभावित देशव्यापी बीमा धोखाधड़ी की जांच का रास्ता खोला। कोर्ट ने चिंता जताई कि ऐसी धोखाधड़ी से केवल बीमा कंपनियों को वित्तीय नुकसान नहीं होता, बल्कि अंततः इसका बोझ ईमानदार पॉलिसीधारकों पर बढ़े हुए प्रीमियम के रूप में पड़ सकता है।
VAHAN, SARATHI और EDAR पोर्टल को जोड़ने का सुझाव
फर्जी दावों की पहचान के लिए सुनवाई के दौरान common insurance claims portal बनाने का सुझाव भी सामने आया। इसमें बीमा कंपनियां यह जांच सकेंगी कि कोई वाहन, व्यक्ति या अन्य संस्था पहले भी किसी दुर्घटना या बीमा दावे में शामिल रही है या नहीं।
इस प्रस्ताव को VAHAN और SARATHI जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के E-Detailed Accident Report (EDAR) पोर्टल को भी संबंधित डेटाबेस से जोड़ने पर विचार किया गया है। इससे दुर्घटना, वाहन और दुर्घटना स्थल की जानकारी को अधिक प्रभावी ढंग से सत्यापित करने में मदद मिल सकती है।
IRDAI, वित्त मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय भी पक्षकार
मामले के व्यापक प्रभाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण संस्थाओं को कार्यवाही में पक्षकार बनाया है।
- Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) — Respondent No. 104
- वित्त मंत्रालय — Respondent No. 105
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय — Respondent No. 106
- General Insurance Council — Respondent No. 107
इन नए पक्षकारों को अपने मौजूदा दायित्वों और फर्जी बीमा दावों से निपटने के लिए प्रस्तावित उपायों के संबंध में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
कंपनियों के प्रमुखों को भी नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने उन बीमा कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए हैं, जो पूर्व में अदालत द्वारा निर्देशित व्यक्तिगत उपस्थिति के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। अदालत ने फिलहाल अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करने का अवसर दिया है कि अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।
उत्तर प्रदेश की SIT कार्रवाई का भी उल्लेख
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में पहले से गठित SIT की कार्रवाई की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई। राज्य के अनुसार उसे 2,188 शिकायतें मिली थीं, जिनमें से 1,029 से अधिक मामलों की जांच की गई और 231 FIR में 533 आरोपियों को नामजद किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की कार्रवाई की सराहना की।
23 सितंबर को अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे होगी। सभी संबंधित पक्षों को अपने हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं और अगली सुनवाई पर अपने affidavits का एक पेज का précis/summary तैयार रखने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से मोटर दुर्घटना बीमा दावों में संभावित फर्जीवाड़े की जांच के लिए देशभर में एक समान संस्थागत व्यवस्था विकसित होने की संभावना है।
