LAW'S VERDICT

राजस्थान हाईकोर्ट के ACJ को बदलने की मांग: CJI बोले मीडिया में आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर फैसला नहीं होगा

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, नई दिल्ली। 

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को तत्काल बदलने और किसी दूसरे हाईकोर्ट से मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह CJI सूर्यकांत से किये जाने के मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले का खुलासा बीते मंगलवार को लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच द्वारा किया गया था। बुधवार को CJI के नाम से जारी किये गए बयान में कहा गया है कि मीडिया में लगाए जा रहे आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर इस मसले का फैसला नहीं किया जा सकता। बयान के अनुसार जस्टिस शर्मा की निरंतरता, ट्रांसफर या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई के संबंध में फैसला संबंधित संस्थागत प्राधिकारी द्वारा सभी उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद लिया जाएगा।

यहाँ पर उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त 2026 को लिखे तीन पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासन और केस लिस्टिंग से जुड़े कई गंभीर आरोप उठाए थे। जस्टिस मेहता के पत्रों में आरोप लगाया गया था कि जस्टिस शर्मा ने प्रशासनिक शक्तियों का कथित दुरुपयोग किया और कुछ मामलों की लिस्टिंग में प्रभावशाली या संपन्न पक्षकारों को लाभ पहुंचाने वाली व्यवस्था की। हालांकि, इन आरोपों की अभी कोई अंतिम न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।

CJI से दूसरे राज्य से चीफ जस्टिस नियुक्त करने का आग्रह

अपने पत्र में जस्टिस मेहता ने CJI सूर्यकांत से राजस्थान हाईकोर्ट के लिए किसी अन्य राज्य से चीफ जस्टिस नियुक्त करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि संस्थान के हित में यह कदम तत्काल उठाया जाना चाहिए। पत्रों में जस्टिस शर्मा के प्रशासनिक कामकाज, केस लिस्टिंग और न्यायिक सहयोगियों के साथ उनके कथित व्यवहार को लेकर भी चिंता जताई गई है।

केस लिस्टिंग में कथित हेरफेर का आरोप

जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण मामलों की लिस्टिंग को लेकर प्रशासनिक शक्तियों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया। उन्होंने उदयपुर की कीमती जमीनों से जुड़े मामलों की एक श्रृंखला का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ अपीलों को जयपुर स्थित जस्टिस शर्मा की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया गया, जबकि पहले जस्टिस शर्मा स्वयं ऐसे मामलों की लिस्टिंग को लेकर अलग दृष्टिकोण व्यक्त कर चुके थे।

जजों को ट्रांसफर की कथित धमकी का भी उल्लेख

2 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के कुछ जजों द्वारा कथित तौर पर उनके समक्ष अपनी चिंता व्यक्त किए जाने का उल्लेख किया। पत्र के अनुसार, कुछ जजों ने जस्टिस शर्मा के व्यवहार को लेकर असंतोष जताया और आरोप लगाया कि उन्हें ट्रांसफर की कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। ये सभी बातें जस्टिस मेहता द्वारा CJI को भेजे गए पत्रों में लगाए गए आरोपों और उनके द्वारा बताए गए इनपुट पर आधारित हैं; इनका स्वतंत्र न्यायिक निर्धारण अभी नहीं हुआ है।

प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी शिकायतों का हवाला

17 अगस्त के पत्र में जस्टिस मेहता ने एक मौजूदा राजस्थान हाईकोर्ट जज से संबंधित कथित शिकायत का भी उल्लेख किया। इसके अलावा एक अधिवक्ता की शिकायत का हवाला देते हुए स्थायी लोक अदालतों में नियुक्तियों और हाईकोर्ट में महिला अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट जज पर नियुक्त करने के लिए भेजे गए नामों को लेकर भी सवाल उठाए गए।

CJI सूर्यकांत ने कहा- आरोपों को निष्कर्ष नहीं माना जा सकता

जस्टिस मेहता के पत्रों के सार्वजनिक होने के बाद CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने उठाई गई चिंताओं का संज्ञान लिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही निपटा जाएगा। CJI ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप लगाए जाने भर से उन्हें संबंधित जज के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। संबंधित न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का निष्पक्ष अवसर दिया जाना आवश्यक है।

मीडिया में आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर फैसला नहीं होगा

CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि जज से संबंधित शिकायतों की सामग्री का adjudication सार्वजनिक मंच या मीडिया में नहीं किया जा सकता। सक्षम संस्थागत प्राधिकारी उपलब्ध सामग्री और संबंधित न्यायाधीश की प्रतिक्रिया पर विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कॉलेजियम देश के शेष हाईकोर्टों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।

जस्टिस संदीप मेहता का राजस्थान हाईकोर्ट से रहा है संबंध

यहाँ पर बता दें कि जस्टिस संदीप मेहता राजस्थान हाईकोर्ट से ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने 30 मई 2011 को राजस्थान हाईकोर्ट के जज के रूप में कार्यभार संभाला था। फरवरी 2023 में उन्हें गोवाहाटी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया और इसके बाद 9 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया।

वर्तमान घटनाक्रम न्यायपालिका के प्रशासनिक कामकाज, न्यायिक स्वतंत्रता और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाता है। अब इस मामले में कॉलेजियम और सक्षम संस्थागत स्तर पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।


                                               CJI के नाम से जारी बयान देखें         



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