LAW'S VERDICT

आवारा कुत्तों के आतंक पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार बताए, हमले रोकने के लिए अब तक क्या किया?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की जनहित याचिका; राज्य सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, 6 अगस्त को अगली सुनवाई

जबलपुर। मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और मासूम बच्चों पर हो रहे जानलेवा हमलों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट से भेजे गए मामले पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए सरकार को अब तक उठाए गए कदमों की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। इसके बाद शीर्ष अदालत ने 19 मई 2026 को देश के सभी हाईकोर्ट को इस गंभीर समस्या पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने के निर्देश दिए।

इसी परिप्रेक्ष्य में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है।

‘शहर आवारा कुत्तों के आतंक में, बच्चे चुका रहे हैं कीमत’

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि ‘शहर आवारा कुत्तों के आतंक में, बच्चे चुका रहे हैं कीमत’ शीर्षक से जनहित याचिका दर्ज कर मामले की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। शीर्ष अदालत ने कहा था कि समस्या का ठोस समाधान होने तक हाईकोर्ट स्तर पर इसकी निगरानी जारी रखी जाए।

इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई है।

सरकार से पूछा- अब तक क्या कदम उठाए?

शुक्रवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह उपस्थित हुए। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने और हमलों की घटनाओं को रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी स्टेटस रिपोर्ट के माध्यम से पेश करने के निर्देश दिए।

अब इस मामले में राज्य सरकार को हाईकोर्ट के समक्ष अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। मामले पर अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-25217-2026

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