LAW'S VERDICT

'किस आधार पर चुने गए 157 सरकारी वकील?' हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता से मांगा पूरा रिकॉर्ड

लॉ ऑफिसरों की नियुक्ति पर कोर्ट सख्त, कहा- चयन प्रक्रिया बतानी होगी; 10 अगस्त को अगली सुनवाई

जबलपुर। मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय में 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और यह स्पष्ट होना चाहिए कि आवेदन मंगाने के बाद चयन का मानदंड (क्राइटेरिया) क्या था और किन आधारों पर नियुक्तियां की गईं। कोर्ट ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे 10 अगस्त को अगली सुनवाई के दौरान पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखें।

157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्तियों को दी गई चुनौती

याचिका मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के सह सचिव योगेश सोनी की ओर से दायर की गई है। इसमें 25 दिसंबर 2025 को विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी 157 लॉ ऑफिसरों की नियुक्ति सूची को चुनौती दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है, लेकिन हालिया नियुक्तियों में उस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

बार के पूर्व पदाधिकारियों ने भी उठाए सवाल

मामले में मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डी.के. जैन और पूर्व सचिव पारितोष त्रिवेदी भी पक्षकार बने हैं। उन्होंने नई नियुक्तियों में अपनाए गए चयन मानकों पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय पैरवी कर रहे हैं।

'सरकारी वकीलों के पास अपना जवाब बनाने का समय नहीं?'

सुनवाई के दौरान कुछ सरकारी वकीलों ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इस पर डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा,

"जो सरकारी वकील हर रोज दूसरों के लिए जवाब तैयार करते हैं, क्या उनके पास अपना जवाब तैयार करने का भी समय नहीं है?"

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित सरकारी वकील समय पर अपना जवाब दाखिल नहीं करते हैं, तो यह माना जाएगा कि वे राज्य सरकार के जवाब से सहमत हैं।

10 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता को चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अब 10 अगस्त की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि 157 सरकारी वकीलों की नियुक्ति तय नियमों के अनुसार हुई या नहीं।

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