LAW'S VERDICT

12 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिला इंसाफ, हाईकोर्ट की सख्ती से वैज्ञानिक अधिकारी बनीं डॉ. ममता राज

MPPSC ने जारी किया नियुक्ति आदेश, हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का किया निपटारा 

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के बाद 12 वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहीं सागर की डॉ. ममता राज को आखिरकार उनका अधिकार मिल गया। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने उन्हें एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी), सागर में वैज्ञानिक अधिकारी (केमिस्ट्री) के पद पर नियुक्ति आदेश जारी कर दिया। नियुक्ति आदेश अदालत में प्रस्तुत किए जाने के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।

2014 में शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई

डॉ. ममता राज सागर के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने साइंटिफिक ऑफिसर (केमिस्ट्री) भर्ती के लिए एमपीपीएससी की परीक्षा में आवेदन किया था, लेकिन चयन प्रक्रिया के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने पर वर्ष 2014 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

2015 के आदेश का नहीं हुआ था पालन

हाईकोर्ट ने 7 सितंबर 2015 को आदेश दिया था कि यदि याचिकाकर्ता पात्र पाई जाती हैं तो उन्हें रिक्त पद पर नियुक्ति देने पर विचार किया जाए। लेकिन आदेश का पालन नहीं होने पर उसी वर्ष अवमानना याचिका दायर की गई।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जारी हुआ नियुक्ति आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा ने 16 जून और 6 जुलाई को राज्य पक्ष के प्रति कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद एमपीपीएससी ने डॉ. ममता राज के पक्ष में वैज्ञानिक अधिकारी पद का नियुक्ति आदेश जारी कर दिया।

नियुक्ति आदेश की प्रति अदालत में पेश होने पर हाईकोर्ट ने माना कि उसके आदेश का पालन हो चुका है और अवमानना याचिका का निस्तारण कर दिया।

न्यायिक हस्तक्षेप से निष्कर्ष तक पहुंचा मामला 

मामले में याचिकाकर्ता डॉ. ममता राज की ओर से अधिवक्ता पारितोष गुप्ता ने पैरवी की। यह मामला लंबे समय तक लंबित रहने के बाद अंततः न्यायिक हस्तक्षेप से अपने निष्कर्ष तक पहुंचा।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    CONC-2043-2015

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