प्रमोशन में आरक्षण मामले में सभी पक्षों को डेटा देने हाईकोर्ट के निर्देश, 21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण (Reservation in Promotion) को लेकर चल रही अहम सुनवाई के दौरान मंगलवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की स्पेशल डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि क्वांटिफिएबल डेटा कोई "सीक्रेट दस्तावेज" नहीं है, जिसे छिपाकर रखा जाए। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि यह डेटा पेन ड्राइव के माध्यम से सभी पक्षों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे 17 जुलाई तक अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकें। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे होगी।
प्रमोशन नियम-2025 को दी गई है चुनौती
यह मामला भोपाल की डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें मध्य प्रदेश सरकार के पदोन्नति नियम-2025 के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा और अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ, जबकि अजाक्स संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं अधिवक्ता विनायक शाह ने पक्ष रखा।
कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों को मिले समान अवसर
हाईकोर्ट ने कहा कि जब सरकार अपने निर्णय के समर्थन में क्वांटिफिएबल डेटा पर भरोसा कर रही है, तो उस डेटा तक सभी पक्षों की समान पहुंच होना जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत सभी संबंधित पक्षों को रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रख सकें।
ओबीसी 27% आरक्षण पर सुनवाई आज
उधर, मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किए जाने से संबंधित 91 याचिकाओं पर अब 15 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे सुनवाई होगी।
ये मामले मंगलवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 24 जून के आदेश के अनुसार मामलों को 15 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना था, लेकिन त्रुटिवश 14 जुलाई की सूची में शामिल हो गए। इसके बाद अदालत ने सभी मामलों को 15 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

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