LAW'S VERDICT

सिर्फ कार्रवाई का दावा नहीं चलेगा, बताइए शोर मचाने वालों पर क्या एक्शन लिया?

इंदौर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट की पुलिस और प्रशासन को फटकार, शपथ पत्र पर मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पुलिस, प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रवैये पर नाराजगी जताई है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस अलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाब असंतोषजनक ठहराया है। बेंच ने संबंधित अधिकारियों को शपथपत्र (Affidavit) के साथ विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश यह बताने कहा है कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई और आगे क्या प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ACP कोर्ट में हुए पेश

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव धनोदकर और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रद्युम्न किबे उपस्थित रहे। वहीं, खजराना जोन के ACP आशीष पटेल, मल्हारगंज जोन के ACP  एएस जादौन तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इंदौर के क्षेत्रीय अधिकारी सतीश के. चौकसे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। सभी अधिकारियों ने अदालत को बताया कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अदालत उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई।

हाईकोर्ट का सख्त आदेश—हलफनामे के साथ बताइए क्या किया?

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी शपथपत्र (Affidavit) के साथ यह जानकारी प्रस्तुत करें-

  • ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई?
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे?

DM से भी मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक यह भी बताया जाए कि जिला दंडाधिकारी (District Magistrate) ने मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 (M.P. Kolahal Niyantran Adhiniyam, 1985) की धारा 18 के पालन के लिए क्या कार्रवाई की है।

जनहित याचिका में क्या लगाए गए हैं आरोप?

इंदौर के अधिवक्ता अमिताभ उपाध्याय और लेखक चिन्मय मिश्रा की ओर से वर्ष 2023 में दाखिल इस जनहित याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता किसी धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक आयोजन के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य इंदौर के नागरिकों के शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण जीवन के मौलिक अधिकार की रक्षा करना है। याचिका के अनुसार—

  • शहर में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों के नाम पर बिना नियंत्रण तेज आवाज में लाउडस्पीकर और डीजे बजाए जा रहे हैं।
  • पुलिस और प्रशासन अपने ही विभाग द्वारा जारी आदेशों का पालन कराने में विफल रहे हैं।
  • लगातार हो रहे ध्वनि प्रदूषण से बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग और पढ़ाई कर रहे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
  • शिकायतों के बावजूद पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे नागरिकों के शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

17 अगस्त से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने सभी अधिकारियों को आवश्यक जवाब और हलफनामा दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की है। साथ ही आदेश की प्रति इस विषय से संबंधित अन्य लंबित प्रकरण में भी रखने के निर्देश दिए गए हैं।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-25397-2023

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