जस्टिस विशाल मिश्रा की तल्ख टिप्पणी- जज बदलवाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं, 5 अगस्त को व्यक्तिगत पेशी के आदेश
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित कोशिश पर कड़ा रुख अपनाते हुए ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और अधिवक्ता राजकुमार मिश्रा के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने दोनों को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश देते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए?
अदालत ने दोनों को 5 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है और स्पष्ट किया है कि अनुपस्थित रहने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
663 प्लॉटों के विवाद से जुड़ा है मामला
मामला ग्वालियर गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। संस्था ने 28 जनवरी 2023 को GDA द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत संस्था के साथ किए गए सभी अनुबंध समाप्त कर दिए गए थे और उससे जुड़े 663 प्लॉटों के नामांतरण भी निरस्त कर दिए गए थे।
इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही GDA के आदेश पर अंतरिम रोक लगा चुका है।
सुनवाई के बीच बदला वकालतनामा, यहीं से उठा 'बेंच हंटिंग' का सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि 29 नवंबर 2025 को याचिका दायर होने के बाद 14 जनवरी 2026 को GDA की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं का वकालतनामा दाखिल किया गया था।
लेकिन सुनवाई के बीच 25 जून 2026 को अचानक नया वकालतनामा दाखिल किया गया, जिसमें पहली बार अधिवक्ता राजकुमार मिश्रा का नाम जोड़ा गया।
अदालत ने कहा कि जब पहले से वरिष्ठ अधिवक्ता रिकॉर्ड पर मौजूद थे, तो बीच सुनवाई में नए अधिवक्ता को जोड़ने का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।
हाईकोर्ट: यह 'बेंच हंटिंग' का स्पष्ट प्रयास
जस्टिस विशाल मिश्रा ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि यह कदम मामले की सुनवाई कर रही बेंच बदलवाने और न्यायाधीश को प्रकरण से अलग कराने की मंशा से उठाया गया।
अदालत ने इसे "बेंच हंटिंग" (Bench Hunting) का स्पष्ट प्रयास माना और कहा कि ऐसी प्रवृत्ति न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर सीधा प्रहार है।
बिना शर्त माफी भी नहीं आई काम
GDA के CEO ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि यह सब गलतीवश हुआ था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
खंडपीठ ने CEO और अधिवक्ता राजकुमार मिश्रा के खिलाफ शोकॉज नोटिस जारी करने का आदेश देते हुए पूछा कि उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
न्यायपालिका का सख्त संदेश
हाईकोर्ट के इस आदेश को न्यायिक प्रक्रिया में 'बेंच हंटिंग' जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायाधीश बदलवाने या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई से भी परहेज नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-47023-2025
