कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर अवमानना केस में माँगा जवाब
पूर्व रीडर ने दाखिल की अवमानना याचिका
यह अवमानना याचिका रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के विधि विभाग (Law Department) के पूर्व रीडर डॉ. आर.बी. दुबे की ओर से दायर की गई है।
याचिका के अनुसार, डॉ. दुबे ने 29 जून 2006 को अपना इस्तीफा दिया था, लेकिन बाद में उसे वापस लेने की इच्छा जताई। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस्तीफा वापस लेने की अनुमति नहीं दी और 29 जुलाई 2006 को उसे स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है इस्तीफा स्वीकार करने का आदेश
डॉ. दुबे ने विश्वविद्यालय की इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस्तीफा स्वीकार करने का आदेश निरस्त कर दिया था और विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता को सभी बकाया सेवा लाभों (Arrears and Service Benefits) का भुगतान किया जाए।
कोर्ट के आदेश का पालन नहीं, अब अवमानना की कार्रवाई
याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद आज तक उन्हें बकाया लाभों का भुगतान नहीं किया गया। इसी आधार पर उन्होंने अवमानना याचिका दायर की है।
इस याचिका में रादुविवि के रजिस्ट्रार डॉ. रविशंकर सोनवाल, कुलाधिपति मंगूभाई पटेल और डिप्टी रजिस्ट्रार (स्थापना) पवन साहू को पक्षकार बनाया गया है।
तीनों अधिकारियों से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा। प्रारम्भिक सुनवाई के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका में बनाये गए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय के पूर्व आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया और अवमानना की कार्रवाई बनती है या नहीं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CONC-3247-2026
