21 हजार डिजिटल वायरलेस सेट्स की खरीदी में अनियमितता, हाईकोर्ट बोला—फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद टेंडर रद्द नहीं किया जा सकता
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग के लिए 26 जिलों में 21 हजार डिजिटल वीएचएफ वायरलेस सेट्स की खरीदी से जुड़े टेंडर विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार द्वारा जारी 6वें टेंडर को निरस्त कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद टेंडर प्रक्रिया को मनमाने तरीके से रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में कम कीमत के नाम पर गुणवत्ता से समझौता स्वीकार्य नहीं है।
खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि 5वें टेंडर में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी की टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए तथा याचिकाकर्ता को ₹50 हजार हर्जाना भी अदा किया जाए।
चीन की कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप
यह याचिका नई दिल्ली की मोबाइल कम्युनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की थी। कंपनी का कहना था कि 5वें टेंडर में उसने ₹100.17 करोड़ की सबसे कम बोली लगाई थी, जबकि चीन की कंपनी M/s CWD Limited दूसरे स्थान पर थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि चीन की कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पहले 5वां टेंडर रद्द किया गया और फिर टेंडर की अनुमानित लागत भी कम कर दी गई। याचिकाकर्ता के अनुसार सितंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच एक ही कार्य के लिए छह बार टेंडर जारी और निरस्त किए गए, जो पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
'जिसने एक भी मोबाइल नहीं बेचा, उसे दिया जा रहा था ठेका'
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ तथा अधिवक्ता अमन डाबरा, रोहित शर्मा और वेदान्त गुप्ता ने दलील दी कि जिस कंपनी ने देश में अब तक एक भी मोबाइल फोन नहीं बेचा और जिसके पास आवश्यक लाइसेंस भी नहीं है, उसे 21 हजार डिजिटल वायरलेस सेट्स की सप्लाई का ठेका देना पूरी तरह अनुचित है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि:
"सरकारी खजाने के पैसे बचाना प्रशासनिक आधार हो सकता है, लेकिन यह कानून, अनिवार्य सुरक्षा मानकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकता। पुलिस विभाग के वायरलेस नेटवर्क जैसे संवेदनशील मामले में घटिया उपकरणों की सप्लाई स्वीकार नहीं की जा सकती।"
अदालत ने माना कि सुरक्षा से जुड़े उपकरणों की खरीद में गुणवत्ता और वैधानिक प्रक्रिया सर्वोपरि है तथा केवल कम कीमत के आधार पर निर्णय लेना सार्वजनिक हित के विपरीत होगा।
फैसले का महत्व
इस निर्णय को सरकारी खरीद (Government Procurement) और सार्वजनिक टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि टेंडर प्रक्रिया में मनमानी, पक्षपात या सुरक्षा मानकों से समझौता न्यायिक समीक्षा से बच नहीं सकता।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-3569-2026
