क्रिमिनल अपील में गलत जवाब दाखिल होने का दावा, हस्ताक्षरित ड्राफ्ट और कोर्ट रिकॉर्ड में अंतर का आरोप
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले न्यायालयीन जवाब (Pleadings) में कथित छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव द्वारा महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को भेजी गई शिकायत में आरोप है कि उनके द्वारा हस्ताक्षरित मूल ड्राफ्ट में अनधिकृत बदलाव कर अदालत में अलग जवाब दाखिल किया गया। इस मामले में महाधिवक्ता से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
CRA No. 5209/2024 में क्या है विवाद?
शिकायत के अनुसार, CRA No. 5209/2024 में धारा 389(1) CrPC के तहत दायर आवेदन पर राज्य की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब में गंभीर अंतर पाया गया।
उप महाधिवक्ता की शिकायत में बताया गया है कि उनके द्वारा तैयार और हस्ताक्षरित मूल ड्राफ्ट में पीड़िता के बयान तथा ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए दोषसिद्धि एवं सजा के निर्णय का समर्थन किया गया था। लेकिन जब मामला सुनवाई में आया तो अदालत में उपलब्ध रिकॉर्ड में दर्ज जवाब के पैराग्राफ-4 की सामग्री बदली हुई बताई गई।
राज्य के रुख के विपरीत जवाब दाखिल होने का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि संशोधित पैराग्राफ में ट्रायल कोर्ट के फैसले को ही "गलत और अन्यायपूर्ण" बताया गया, जो राज्य सरकार के आधिकारिक रुख के विपरीत था।
आरोप है कि जिस दस्तावेज पर शासकीय अधिवक्ता ने हस्ताक्षर किए थे, उसमें अभियुक्त की सजा का समर्थन किया गया था, जबकि अदालत में दाखिल उत्तर में अभियुक्त के पक्ष में तर्क शामिल कर दिए गए।
महाधिवक्ता से जांच की मांग
इस कथित अनियमितता को गंभीर बताते हुए महाधिवक्ता को लिखित शिकायत सौंपी गई है। शिकायत में मांग की गई है कि यह पता लगाया जाए कि हस्ताक्षरित ड्राफ्ट में बदलाव किस स्तर पर और किसके निर्देश पर किया गया तथा यदि कोई अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट
फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और इसकी जांच की मांग की गई है। अभी तक इस संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेज में वास्तव में अनधिकृत परिवर्तन हुआ था या नहीं।
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