माफ़ी मंजूर कर MP हाईकोर्ट ने क्रिमिनल कंटेम्प्ट केस खत्म किया
जज को फोन करने के आरोप से शुरू हुआ था मामला
यह मामला तब सामने आया था जब 1 सितंबर 2025 को जस्टिस विशाल मिश्रा ने न्यायालय में बताया था कि कटनी से भाजपा विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। इस खुलासे के बाद कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने स्वतः लिया था अवमानना का संज्ञान
हालांकि, हाईकोर्ट ने मूल याचिका का निस्तारण कर दिया था, लेकिन न्यायपालिका की गरिमा से जुड़े मुद्दे को गंभीर मानते हुए विधायक संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की। मामले में 6 अप्रैल को नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद विधायक को कई बार अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा।
तीन बार कोर्ट में पेश हुए संजय पाठक
हाईकोर्ट के निर्देश पर विधायक संजय पाठक 21 अप्रैल, 14 मई और 15 जुलाई को अदालत में उपस्थित हुए। 15 जुलाई को संजय पाठक और आशुतोष दीक्षित की ओर से दी गईं दलीलें पूरी होने के बाद खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाया गया।
माफी स्वीकार, लेकिन दी सख्त चेतावनी
खंडपीठ ने विधायक द्वारा व्यक्त की गई माफी को स्वीकार करते हुए आपराधिक अवमानना का मामला समाप्त कर दिया, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में न्यायाधीशों से संपर्क करने या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी कोई भी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए। विधायक संजय पाठक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, अनिल खरे तथा अधिवक्ता सिद्धार्थ शुक्ला और शमिला इरम फातिमा ने पैरवी की।
फैसले का महत्व
यह आदेश न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के सिद्धांत को रेखांकित करता है। हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि न्यायाधीशों से अनुचित संपर्क की कोशिश को गंभीरता से देखा जाएगा, हालांकि मामले के तथ्यों और माफी को ध्यान में रखते हुए इस प्रकरण में अवमानना कार्यवाही का समापन किया गया।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CONCR-5-2026
