वन, वन्यजीव और पर्यावरण कानूनों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, न्यायपालिका की भूमिका पर दिया जोर
जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी में 'वन, वन्यजीव और पर्यावरण कानूनों से संबंधित प्रमुख मुद्दे' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश जस्टिस आनंद पाठक ने किया।
अपने उद्घाटन संबोधन में जस्टिस पाठक ने कहा कि "वकील समाज के सोशल इंजीनियर हैं। उन्हें ही आगे आकर समाज को नेतृत्व देना होगा।" उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज वैश्विक चुनौती बन चुका है और ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
विशेष सत्र में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुभंरजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समिता राजोरा तथा मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व निदेशक हेमंत शर्मा ने पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया। विशेषज्ञों ने वन भूमि विवाद, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े विभिन्न कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रुपराह भी विशेष रूप से मौजूद थे।
वन्यजीव अपराध और फॉरेंसिक पर तकनीकी व्याख्यान
संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के प्रमुख रितेश सरोठिया ने वन्यजीव अपराधों की जांच और रोकथाम की रणनीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक स्कूल की डॉ. काजल कुमार जाधव और डॉ. निधि राजपूत ने वन्यजीव फॉरेंसिक से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।
दूसरे दिन होंगे इंटरएक्टिव सत्र
राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे और अंतिम दिन रविवार को वन एवं वन्यजीव कानूनों के व्यावहारिक पक्षों पर इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया, साक्ष्यों की स्वीकार्यता, विवेचना तथा चार्जशीट दाखिल करने सहित अन्य महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर विशेषज्ञ प्रतिभागियों से संवाद करेंगे।
