LAW'S VERDICT

‘जांच अधिकारी 2021 से 2025 तक क्यों सोते रहे?’: EOW डीजी उपेन्द्र जैन हुए तलब

रायसेन के साइकिल घोटाले की चार्जशीट में देरी पर हाईकोर्ट सख्त 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के चर्चित साइकिल घोटाले में चार्जशीट दाखिल करने में हुई लंबी देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेन्द्र जैन को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने डीजी द्वारा पेश किए गए हलफनामे पर असंतोष जताते हुए उन्हें 11 सितंबर 2026 को हाजिर होकर यह बताने कहा है कि मामले में वर्ष 2021 में मंजूरी मिलने के बावजूद करीब चार साल तक चार्जशीट दाखिल क्यों नहीं की गई।

‘2021 से 2025 तक जांच अधिकारी क्यों सोते रहे?’

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ईओडब्ल्यू की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए डीजी उपेन्द्र जैन से पूछा है कि मामले के जांच अधिकारी वर्ष 2021 से 2025 तक क्यों सोते रहे? बेंच ने यह भी सवाल किया कि कार्रवाई करने के बजाय जांच अधिकारी केवल पत्राचार करते रहे तो इसके पीछे वजह क्या थी। अदालत ने डीजी से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि जब वर्ष 2021 में चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी मिल चुकी थी, तो केवल कवरिंग लेटर और सैंक्शन लेटर की तारीखों में अंतर होने के कारण चार्जशीट दाखिल करने में आखिर क्या कानूनी बाधा थी।

2013 के साइकिल घोटाले से जुड़ा है मामला

मामला रायसेन जिले में वर्ष 2013 में स्कूली छात्रों को मुफ्त साइकिल उपलब्ध कराने की योजना में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। रायसेन जिले की बरेली तहसील की सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ और उमराव धाकड़ की ओर से यह याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार वर्ष 2013 में कुछ अभिभावकों ने स्कूली छात्रों को मुफ्त साइकिल देने की योजना में अनियमितता की शिकायत की थी। शिकायत की जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने 7 दिसंबर 2015 को याचिकाकर्ताओं और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसी एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

2021 में मंजूरी, फिर भी चार्जशीट दाखिल नहीं

मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल से सीधा सवाल किया था कि जब मामले में वर्ष 2021 में अभियोजन की मंजूरी प्राप्त हो गई थी, तो इसके बावजूद आरोपियों के खिलाफ अब तक चार्जशीट क्यों दाखिल नहीं की गई। इसके बाद ईओडब्ल्यू की ओर से डीजी का हलफनामा पेश किया गया। लेकिन अदालत इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई। अब डिवीजन बेंच ने डीजी उपेन्द्र जैन को स्वयं उपस्थित होकर जांच में हुई देरी और चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने का कारण स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

पत्राचार चलता रहा, कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

हाईकोर्ट ने मामले में जांच की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वर्ष 2021 में आवश्यक मंजूरी मिल चुकी थी, तो उसके बाद जांच अधिकारी द्वारा प्रभावी कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा थी। बेंच ने यह जानना चाहा है कि 2021 से 2025 के बीच जांच अधिकारी ने चार्जशीट दाखिल करने के बजाय केवल पत्राचार क्यों किया। अदालत ने विशेष रूप से कवरिंग लेटर और सैंक्शन लेटर की तारीखों के अंतर को लेकर ईओडब्ल्यू से कानूनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

11 सितंबर को डीजी को खुद देना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल उपेन्द्र जैन को 11 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अदालत अब डीजी से यह जानना चाहती है कि जांच में इतनी लंबी देरी क्यों हुई और अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद भी चार्जशीट दाखिल करने में क्या बाधा थी। 

मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एमआर वर्मा तथा ईओडब्ल्यू की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      WP-32579-2026

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