LAW'S VERDICT

MP High Court ने पूछा: ‘बुजुर्गों को लूटकर ऐश कर रहे साइबर ठग, पुलिस क्या कर रही?’

जबलपुर एसपी समेत अफसरों को केस डायरी के साथ किया तलब, मप्र के गृह सचिव के साथ बंगाल-झारखंड के DGP से भी जवाब माँगा 

जबलपुर। मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों और पुलिस की धीमी जांच पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी के साथ हुई 6.24 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि "साइबर ठग बुजुर्गों की जिंदगी भर की कमाई लूटकर ऐश कर रहे हैं और पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने में विफल नजर आ रही है।"

जस्टिस हिमान्शु जोशी की एकलपीठ ने जबलपुर एसपी, गोराबाजार थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को मूल केस डायरी सहित व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों (DGP) तथा मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) से भी जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को होगी।

रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 6.24 लाख की साइबर ठगी

याचिकाकर्ता चैताली मित्रा (70 वर्ष), जो एक बैंक की सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, ने हाईकोर्ट को बताया कि 26 अप्रैल 2025 को क्रेडिट कार्ड अपडेट करने के नाम पर साइबर ठगों ने उनके साथ 6.24 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। शिकायत दर्ज होने के बावजूद एक वर्ष बीत जाने पर भी न आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, न चार्जशीट दाखिल हुई और न ही रकम वापस दिलाने की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कबीर पॉल ने पक्ष रखा।

पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में कथित छापेमारी का स्थान, कार्रवाई और उसके परिणाम तक का उल्लेख नहीं है।

अदालत ने टिप्पणी की कि यदि आरोपियों के बैंक खाते, मोबाइल नंबर और लोकेशन की जानकारी उपलब्ध थी तो गिरफ्तारी और जांच में इतनी देरी क्यों हुई।

कोर्ट बोला— डिजिटल बैंकिंग से लोगों का भरोसा उठ रहा

अपने अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में साइबर अपराध चिंताजनक गति से बढ़ रहे हैं। कुछ ही सेकंड में ठग बुजुर्गों और पेंशनभोगियों की जीवनभर की जमा-पूंजी हड़प लेते हैं, जिससे लोगों का डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो रहा है।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती, जहां अपराधी जनता के पैसों का आनंद लें और पीड़ित न्याय के लिए वर्षों तक भटकते रहें।

एसपी, टीआई और जांच अधिकारी होंगे कोर्ट में पेश

हाईकोर्ट ने मामले की निगरानी स्वयं करने का फैसला लेते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर:

  • जबलपुर एसपी
  • गोराबाजार थाना प्रभारी
  • जांच अधिकारी

मूल केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों। साथ ही अब तक की गई जांच, छापेमारी, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य राज्यों की पुलिस से हुए पत्राचार का पूरा विवरण भी प्रस्तुत करें।

बंगाल-झारखंड के DGP और MP गृह सचिव भी जवाब दें 

मामले में अंतरराज्यीय जांच को देखते हुए हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों को पक्षकार बनाने की अनुमति दी। इसके अलावा मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) से यह बताने को कहा है कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य में स्थायी विशेष जांच तंत्र (Special Investigation Mechanism) या अलग विंग गठित करने की क्या योजना है।

14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले में पुलिस अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी और जांच की प्रगति की समीक्षा 14 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट में होगी। माना जा रहा है कि यह मामला मध्य प्रदेश में साइबर अपराधों की जांच और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-29570-2025

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