हाईकोर्ट ने कहा- केवल अनुमान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सजा नहीं हो सकती, आरोपी पति-पत्नी की तत्काल रिहाई के आदेश
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगरौली जिले के चर्चित हत्या मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को निरस्त करते हुए आरोपी दंपत्ति को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि "रंजिश दोधारी तलवार है, जो दोनों तरफ काट सकती है।" यदि किसी मामले में पुरानी दुश्मनी है, तो वह अपराध का कारण भी हो सकती है और किसी को झूठा फंसाने का आधार भी।
खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूर्ण और अभेद्य श्रृंखला स्थापित करने में असफल रहा। केवल अनुमान, संदेह और कयासों के आधार पर किसी व्यक्ति को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
जादू-टोने के शक में हत्या का था आरोप
मामला सिंगरौली जिले के देवसर थाना क्षेत्र के ग्राम ओबरी गुरमतटिया टोला का है। अभियोजन के अनुसार 15 अगस्त 2022 को गोरेलाल विश्वकर्मा खेत में पानी लगाने गया था, जहां उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
पुलिस ने आरोप लगाया कि गांव के भैयालाल रावत और उनकी पत्नी बसंती रावत ने जादू-टोने के संदेह के चलते इस हत्या को अंजाम दिया। तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, देवसर ने 14 जून 2025 को दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 एवं 201 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी दंपत्ति ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जहां उनकी ओर से अधिवक्ता बी.के. वैश्य ने पैरवी की।
हाईकोर्ट ने जांच और सबूतों में पाई गंभीर खामियां
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस जांच और अभियोजन के साक्ष्यों में कई गंभीर कमियां चिन्हित कीं।
एफआईआर में किसी पर संदेह नहीं:
मृतक के पिता ने प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी व्यक्ति पर संदेह व्यक्त नहीं किया था। इसके बावजूद पुलिस ने मात्र दो दिन के भीतर आरोपी दंपत्ति को गिरफ्तार कर लिया।
'लास्ट सीन' थ्योरी अविश्वसनीय:
अभियोजन के गवाहों के पुलिस बयान और अदालत में दिए गए बयानों के समय में दो से तीन घंटे का अंतर पाया गया। हाईकोर्ट ने माना कि इससे 'आखिरी बार साथ देखे जाने' का सिद्धांत विश्वसनीय नहीं रह जाता।
रंजिश के कारण झूठे फंसाने की संभावना:
रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच जादू-टोने के संदेह को लेकर पुरानी रंजिश थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में झूठा फंसाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी अधूरी
खंडपीठ ने कहा कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषसिद्धि के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला इतनी मजबूत होनी चाहिए कि किसी अन्य संभावना की गुंजाइश न रहे। इस मामले में ऐसी श्रृंखला स्थापित नहीं हो सकी। इसलिए ट्रायल कोर्ट का फैसला कानून की कसौटी पर टिक नहीं पाया।
इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने आरोपी दंपत्ति की अपील स्वीकार करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा रद्द कर दी और यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CRA-10671-2025
