GNM छात्रों को राहत, 1,607 छात्रों का परिणाम फिलहाल रुका, 23 जून को होगी अहम सुनवाई
जबलपुर। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज घोटाले में हाईकोर्ट ने छात्रों के हित में बड़ा अंतरिम आदेश पारित किया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शैक्षणिक सत्र 2022-23 के GNM प्रथम वर्ष के 8,969 छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित करने की अनुमति दे दी है। यह राहत केवल उन नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को मिलेगी जो जांच में उपयुक्त पाए गए हैं या जिन्होंने निर्धारित कमियां दूर कर ली हैं।
245 उपयुक्त कॉलेजों के छात्रों का रिजल्ट होगा जारी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मप्र नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) अब 245 उपयुक्त नर्सिंग कॉलेजों के 8,969 छात्रों का परीक्षा परिणाम घोषित कर सकेगी। पहले जांच में 156 कॉलेज उपयुक्त पाए गए थे, जबकि कमियों वाले 185 कॉलेजों में से 89 ने आवश्यक सुधार कर लिए हैं। इसके बाद कुल 245 कॉलेजों को उपयुक्त श्रेणी में शामिल किया गया है।
355 अनुपयुक्त कॉलेजों के 1,607 छात्रों का भविष्य अधर में
कोर्ट ने फिलहाल 355 अनुपयुक्त (Unsuitable) नर्सिंग कॉलेजों के 1,607 छात्रों के परिणाम जारी करने पर रोक बरकरार रखी है। ये छात्र पूर्व आदेश के तहत परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन कॉलेजों की वैधता और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल होने के कारण उनके परिणाम रोके गए हैं।
GNM तृतीय वर्ष की परीक्षा कराने की भी अनुमति
हाईकोर्ट ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 के GNM तृतीय वर्ष के छात्रों को भी राहत देते हुए परीक्षा आयोजित करने की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने कहा कि योग्य कॉलेजों के छात्र पहले ही लंबे समय से शैक्षणिक नुकसान झेल रहे हैं। इसलिए MPNRC परीक्षा आयोजित कर परिणाम घोषित कर सकेगी और इसके लिए अलग से न्यायालय की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
सीबीआई और INC से मांगा गया पूरा डेटा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक वगरेचा ने दलील दी कि केवल उपयुक्त कॉलेजों के छात्रों को ही आगे की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि सीबीआई और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) अनुपयुक्त एवं कमियों वाले कॉलेजों का पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
फर्जी फैकल्टी और डुप्लीकेसी पर हाईकोर्ट सख्त
नर्सिंग घोटाले के केंद्र में कॉलेजों में फर्जी फैकल्टी, बुनियादी सुविधाओं की कमी और एक ही शिक्षक का कई संस्थानों में दर्ज होना जैसे गंभीर आरोप हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल पक्षकारों के बीच का विवाद नहीं बल्कि व्यापक जनहित से जुड़ा मुद्दा है।
अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे फैकल्टी डुप्लीकेसी रोकने और नर्सिंग शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान प्रस्तुत करें। साथ ही सीबीआई और INC को प्रदेश के 355 अनुपयुक्त तथा शेष 96 कमियों वाले कॉलेजों का विस्तृत डेटा उपलब्ध कराने को कहा गया है।
23 जून को होगी अगली अहम सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2026 को निर्धारित की गई है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा, विशाल बघेल, राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी, मडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी, मप्र पैरामेडिकल कॉउन्सिल की ओर से अधिवक्ता मोहन सौसरकर और सीबीआई की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने दलीलें रखीं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-1080-2022
