LAW'S VERDICT

MP हाईकोर्ट की नई वेबसाइट बनी मुसीबत! सुनवाई में हुई हैंग और बफरिंग, 7 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

30 दिन में TCS, Infosys, L&T Technology Services जैसी कंपनियों के विशेषज्ञों से थर्ड पार्टी ऑडिट कराने के निर्देश

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर। 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की नई वेबसाइट में लगातार आ रही तकनीकी गड़बड़ियों, बफरिंग और हैंग होने की समस्या पर हाईकोर्ट ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने वेबसाइट की खराब कार्यप्रणाली के कारण न्यायिक समय बर्बाद होने पर गंभीर नाराजगी जताई।

अदालत ने इस स्थिति को आईटी स्टाफ की अक्षमता से जोड़ते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए चीफ जस्टिस से आवश्यक कदम उठाने को कहा है। वहीं रजिस्ट्रार (IT-CSA) केएस कुशवाह को वेबसाइट की तकनीकी समस्याओं की विस्तृत जांच कर 7 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट में ही हैंग और बफर होती मिली वेबसाइट

डिवीजन बेंच बुधवार को सागर निवासी आदित्य सोनी की अपील पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आलोक वागरेचा और अभिनेष सोनी आवेदक की ओर से जमानत आवेदन पर पक्ष रख रहे थे। कार्यवाही के दौरान बेंच ने हाईकोर्ट की नई वेबसाइट का इस्तेमाल करने का प्रयास किया, लेकिन वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही थी। लगातार बफरिंग और हैंग होने की समस्या सामने आने पर अदालत ने रजिस्ट्रार (IT-CSA) केएस कुशवाह को कोर्ट में बुलाया। खास बात यह रही कि रजिस्ट्रार की मौजूदगी में सिस्टम की जांच के दौरान भी वेबसाइट लगातार हैंग और बफर होती रही। इसके बाद अदालत ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए।

‘जब रजिस्ट्रार के सामने वेबसाइट का यह हाल है तो काम कैसे चल रहा होगा’

अदालत ने कहा कि वेबसाइट की तकनीकी खामियों के कारण न्यायिक समय बर्बाद हो रहा है। बेंच ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जब रजिस्ट्रार (आईटी) की मौजूदगी में भी सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो आम न्यायिक कार्य किस तरह प्रभावित हो रहे होंगे। कोर्ट ने चीफ जस्टिस से संबंधित आईटी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा और यह पता लगाने के निर्देश दिए कि हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली में बाधा क्यों उत्पन्न हो रही है।

7 दिन में विस्तृत जांच रिपोर्ट देने के निर्देश

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (IT-CSA) केएस कुशवाह को निर्देश दिया है कि वेबसाइट की तकनीकी समस्याओं की विस्तृत जांच की जाए और इसके कारणों की जानकारी दी जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही या दोष सामने आता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस संबंध में रिपोर्ट आज से सात दिन के भीतर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

TCS, Infosys और L&T जैसी कंपनियों के विशेषज्ञ करें ऑडिट

हाईकोर्ट ने केवल आंतरिक जांच तक मामला सीमित नहीं रखा है। बेंच ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आईटी सिस्टम की कार्यप्रणाली का स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। इसके लिए Tata Consultancy Services (TCS), Infosys और L&T Technology Services जैसी प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम गठित करने को कहा गया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि स्वतंत्र ऑडिट 30 दिनों के भीतर पूरा कर उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश की जाए। इस विशेषज्ञ टीम में भारत सरकार के C-DOT और MASSCOM के अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है।

वकीलों ने भी नई वेबसाइट पर उठाए सवाल

खुली अदालत में मौजूद अधिवक्ताओं ने भी नई वेबसाइट की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी समस्याएं बताईं। वकीलों ने कहा कि नई वेबसाइट पूरी तरह प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही है और कई मामलों में पुरानी वेबसाइट बेहतर तरीके से काम करती थी। अदालत ने अधिवक्ताओं की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया।

25-26 अगस्त के संदेश का भी कोर्ट ने किया उल्लेख

हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान में लिया कि एक्टिंग चीफ जस्टिस ने 25-26 अगस्त 2026 को न्यायाधीशों के व्हाट्सऐप ग्रुप में वेबसाइट के अपडेट को लेकर मैसेज शेयर किया था। इसमें बताया गया था कि वेबसाइट को अपडेट करने में करीब 8 दिन लगेंगे। अदालत ने कहा कि उस मैसेज के बाद 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन वेबसाइट की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है।

e-Hearing सहित न्यायिक कार्य प्रभावित होने पर चिंता

जस्टिस अग्रवाल ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि हाईकोर्ट की वेबसाइट e-Hearing को सपोर्ट नहीं कर रही है और इसमें कई तकनीकी खामियां हैं। अदालत ने इन समस्याओं को न्यायिक कार्य में बाधा के रूप में गंभीरता से लिया है। अब सात दिन में आंतरिक जांच रिपोर्ट और 30 दिन में स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद वेबसाइट की तकनीकी समस्याओं के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

CJI ने किया था नए सॉफ्टवेयर शुभारम्भ 

यहाँ बता दें कि मप्र हाईकोर्ट के इस नए सॉफ्टवेयर का शुभारम्भ देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने 16 मई  2026 को किया था। यह समारोह केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की मौजूदगी में जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस कल्चरल सेंटर में आयोजित हुआ था, जिसमे सुप्रीम कोर्ट के 5 न्यायाधीश भी मौजूद थे।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      CRA-7908-2023

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