30 जून तक कार्रवाई पर रोक, नई याचिका पर सरकार और नगर निगम से सात दिन में जवाब तलब
जबलपुर। गोलबाजार अतिक्रमण मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नई याचिकाकर्ता कैलसिया गुप्ता को संबंधित भूमि के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
साथ ही अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 30 जून 2026 तक नगर निगम की रिपोर्ट के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मालिकाना हक साबित करने होंगे दस्तावेज
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष नई याचिका दाखिल कर भूमि पर अपने अधिकार का दावा किया गया। इस पर डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता कैलसिया गुप्ता को निर्देश दिया कि वे अपने दावे के समर्थन में स्वामित्व एवं अन्य संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
पहले से हाईकोर्ट की निगरानी में है अतिक्रमण मामला
गौरतलब है कि गोलबाजार निवासी जयदीप शाह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर क्षेत्र में फैले कथित अतिक्रमणों को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 6 मार्च 2026 को जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया था कि जांच पूरी कर 22 जून 2026 तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
12 हजार वर्गफुट सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप
मामले के दौरान हस्तक्षेपकर्ता अमित जैन ने आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि स्थानीय पार्षद अयोध्या तिवारी द्वारा गोलबाजार क्षेत्र की करीब 12 हजार वर्गफुट सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है। आरोपों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को नगर निगम आयुक्त को विधि अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
सभी पक्षों ने रखीं दलीलें
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान मूल याचिकाकर्ता जयदीप शाह की ओर से अधिवक्ता प्रियंकुश जैन, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिषेक सिंह, नगर निगम की ओर से अधिवक्ता सौरभ सुंदर तथा हस्तक्षेपकर्ता अमित जैन की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने अपने-अपने पक्ष रखे।
अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 30 जून 2026 को होगी, जहां अदालत के समक्ष स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों और शासन के जवाब पर विचार किया जाएगा।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-1174-2026
