अनुकंपा नियुक्त कर्मचारी को इंक्रीमेंट देने के आदेश बरकरार, दो महीने में पालन करने के निर्देश
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर कार्यरत एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी को वार्षिक वेतनवृद्धि (Annual Increment) देने के मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की रिट अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कर्मचारी द्वारा नियुक्ति आदेश में निर्धारित हिंदी टाइपिंग परीक्षा और कंप्यूटर योग्यता प्राप्त कर लेने के बाद उसे वेतनवृद्धि से वंचित नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कर्मचारी सुनील राठौर को हिंदी टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण करने की तिथि से एक वार्षिक वेतनवृद्धि तथा सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए गए थे। मप्र हाईकोर्ट के इस फैसले के जरिए उन सभी कर्मचारियों के लिए एक राह खुली है, जिन्होंने तय समय में टाइपिंग की परीक्षा तो पास की, लेकिन आज भी इंक्रीमेंट से वंचित हैं।
क्या है मामला?
मामले के अनुसार, कर्मचारी सुनील राठौर की नियुक्ति 2 फरवरी 2009 को अनुकंपा आधार पर सहायक ग्रेड-3 के पद पर की गई थी। नियुक्ति आदेश की शर्त क्रमांक-2 के तहत उसे एक वर्ष के भीतर भोपाल स्थित मुद्रालेखन परीक्षा परिषद से हिंदी टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण करने और कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त करने की अनिवार्यता थी। ऐसा न करने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान भी रखा गया था।
कर्मचारी का दावा था कि उसने नियुक्ति आदेश की सभी शर्तों का पालन करते हुए हिंदी टाइपिंग परीक्षा उत्तीर्ण कर ली तथा आवश्यक कंप्यूटर योग्यता भी प्राप्त कर ली। इसके बावजूद उसे 1 जुलाई 2020 से मिलने वाली वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ नहीं दिया गया।
राज्य सरकार की दलील नहीं मानी
राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि नियुक्ति आदेश की शर्तों को अलग-थलग नहीं पढ़ा जा सकता और उन्हें समय-समय पर जारी शासकीय परिपत्रों के साथ समन्वयित रूप से देखा जाना चाहिए। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश शर्मा ने दलीलें रखीं।
हालांकि डिवीजन बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि कर्मचारी नियुक्ति आदेश में निर्धारित सभी आवश्यक योग्यताएं प्राप्त कर चुका है, इसलिए उसे वेतनवृद्धि से वंचित रखने का कोई औचित्य नहीं है।
फुल बेंच के फैसले का भी हवाला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि परीक्षा उत्तीर्ण करने की तिथि से वेतनवृद्धि दिए जाने का प्रश्न पहले ही Manoj Kumar Purohit vs State of Madhya Pradesh मामले में फुल बेंच द्वारा तय किया जा चुका है। ऐसे में सिंगल बेंच का आदेश पूरी तरह विधिसम्मत है और उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
राज्य सरकार को मिला दो माह का समय
अपील खारिज होने के बाद राज्य सरकार की ओर से आदेश के पालन के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को सिंगल बेंच के आदेश का पालन करने के लिए दो माह का अतिरिक्त समय प्रदान कर दिया।
कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी नियुक्ति सेवा शर्तों के अधीन हुई है और जिन्होंने निर्धारित समय में आवश्यक विभागीय परीक्षाएं या तकनीकी योग्यताएं प्राप्त कर ली हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि निर्धारित शर्तें पूरी होने के बाद कर्मचारियों को वेतनवृद्धि जैसे वैधानिक लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WA-464-2026
