जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीना विधायक निर्मला सप्रे की कथित दल-बदल के आधार पर अयोग्यता तय करने की मांग वाली नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एवं अन्य की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में ऐसी कोई तात्कालिक परिस्थिति (अर्जेंसी) नहीं है, जिसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष को जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया जाए।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा कि न्यायालय के समक्ष ऐसा कोई प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह सिद्ध हो कि विधायक निर्मला सप्रे को आधिकारिक रूप से Indian National Congress से निष्कासित किया गया है या उन्हें विधिवत Bharatiya Janata Party की सदस्यता प्रदान की गई है।
स्पीकर को तत्काल फैसला लेने का निर्देश देने से इनकार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब विधानसभा सचिवालय में दल-बदल से संबंधित प्रक्रिया पहले से जारी है, तब न्यायालय द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को किसी निश्चित समय सीमा में निर्णय लेने के लिए बाध्य करना उचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती।
कांग्रेस टिकट पर जीती थीं निर्मला सप्रे
याचिका में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से कहा गया था कि निर्मला सप्रे ने बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गईं। इसी आधार पर जून 2024 में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उनकी सदस्यता समाप्त करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि आवेदन दिए जाने के 90 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया, इसलिए हाईकोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को शीघ्र फैसला लेने का निर्देश दे।
अदालत बोली— रिकॉर्ड पर पर्याप्त साक्ष्य नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि निर्मला सप्रे कांग्रेस से निष्कासित हो चुकी हैं या भाजपा की औपचारिक सदस्य बन चुकी हैं। ऐसे में अदालत ने स्पीकर को निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
इन वकीलों ने रखा पक्ष
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विभोर खण्डेलवाल ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए, जबकि निर्मला सप्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने पक्ष रखा।
फैसले के राजनीतिक मायने
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद निर्मला सप्रे की अयोग्यता पर तत्काल निर्णय की संभावना फिलहाल टल गई है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रक्रिया जारी है और रिकॉर्ड पर पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, तब तक न्यायालय इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-36057-2025
