हाई कोर्ट ने कहा- शपथपत्र में गलत जानकारी दी गई; नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता राम प्रकाश यादव का 'टाउट' बताया, शिक्षा विभाग, जेल प्रशासन और बार काउंसिल को 30 दिन में रिपोर्ट के निर्देश
Laws Verdict News | जबलपुरमध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फर्जी वकालतनामे, शपथपत्र में गलत जानकारी देने और कथित टाउटिज्म (दलाली प्रथा) के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने पाया कि जिस नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता बताया गया, वह वास्तव में रीवा जिले के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के गेस्ट लेक्चरर, ग्रेड-II के पद पर कार्यरत हैं।
कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ता राम प्रकाश यादव द्वारा दाखिल शपथपत्र में नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता बताया जाना प्रथमदृष्टया झूठा कथन है। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग, रीवा सेंट्रल जेल प्रशासन और स्टेट बार काउंसिल को अलग-अलग जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। तीनों प्राधिकरणों को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा गया है।
वकालतनामे में शिक्षक को बताया गया अधिवक्ता
मामले की सुनवाई के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल, जबलपुर के वरिष्ठ अधीक्षक अखिलेश सिंह तोमर कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि वकालतनामा जारी करने के संबंध में 24 जुलाई 2026 को SOP जारी की गई है। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि नीरज कुमार साकेत वास्तव में गेस्ट लेक्चरर, ग्रेड-II (अंग्रेजी) हैं और वर्तमान में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, बरेला, थाना सिरमौर, जिला रीवा में कार्यरत हैं।यह जानकारी अधिवक्ता राम प्रकाश यादव द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल किए गए शपथपत्र में किए गए दावे से अलग थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार, राम प्रकाश यादव ने अपने शपथपत्र के पैराग्राफ 2 और 7 में नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता बताया था। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि शपथपत्र में असत्य जानकारी दी गई है।
30 वकालतनामे कराने की बात भी सामने आई
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सिद्धार्थ दत्त ने कोर्ट को बताया कि नीरज साकेत ने अलग-अलग जेल अधिकारियों से राम प्रकाश यादव के लिए 30 वकालतनामे प्राप्त किए थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि यह मान भी लिया जाए कि राजेंद्र साकेत और नीरज साकेत आपस में रिश्तेदार हैं, तो नीरज साकेत को केवल राजेंद्र साकेत का वकालतनामा प्राप्त करने का अधिकार हो सकता था। अन्य 29 आरोपियों के वकालतनामे प्राप्त करने का उन्हें अधिकार नहीं था।रीवा सेंट्रल जेल से 300 से ज्यादा वकालतनामे
जबलपुर सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक अखिलेश सिंह तोमर द्वारा प्रस्तुत जानकारी के आधार पर कोर्ट के समक्ष यह भी आया कि रीवा सेंट्रल जेल से अधिवक्ता राम प्रकाश यादव के लिए 300 से अधिक वकालतनामे प्राप्त किए गए थे। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा रीवा सेंट्रल जेल में उपस्थित होकर वकालतनामे प्राप्त किए जाते थे। हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मामला माना और प्रथमदृष्टया नीरज कुमार साकेत को अधिवक्ता राम प्रकाश यादव का 'टाउट' बताया, जो जेल से वकालतनामे की व्यवस्था कर रहा था और उसके बाद राम प्रकाश यादव अपनी सुविधा के अनुसार उन्हें अदालत में दाखिल कर रहे थे।हाईकोर्ट ने दिए तीन बड़े निर्देश
- स्कूल शिक्षा विभाग करेगा नीरज साकेत की जांच
हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को नीरज कुमार साकेत के आचरण की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साकेत वर्तमान में रीवा जिले में अंग्रेजी के गेस्ट लेक्चरर के रूप में पदस्थ हैं। जांच में उनके कथित आचरण और वकालतनामे प्राप्त करने की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।- रीवा सेंट्रल जेल के तत्कालीन अधीक्षक की जांच
कोर्ट ने रीवा सेंट्रल जेल के तत्कालीन अधीक्षक के खिलाफ भी जांच के निर्देश दिए हैं। जांच का मुख्य मुद्दा यह होगा कि जेल प्रशासन ने आरोपियों और वकालतनामा लेने वाले व्यक्ति के बीच संबंधों का सत्यापन किए बिना वकालतनामों को किस तरह प्रमाणित किया।- स्टेट बार करेगा अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई
हाईकोर्ट ने अधिवक्ता राम प्रकाश यादव के संबंध में मामले को मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल को भेजने का निर्देश दिया है। बार काउंसिल के समक्ष टाउटिज्म की प्रथा और हाईकोर्ट में कथित रूप से झूठा शपथपत्र दाखिल करने के आरोपों पर कार्रवाई का मुद्दा रखा गया है।30 दिन में जांच रिपोर्ट, आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों को भेजने के निर्देश
हाईकोर्ट ने तीनों संबंधित प्राधिकरणों को 30 दिनों के भीतर जांच पूरी कर निष्कर्ष की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी, रीवा को आदेश की प्रति भेजने तथा लोक शिक्षण आयुक्त को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया है। इसी तरह जेल एवं सुधार प्रशासन के महानिदेशक को भी आदेश की प्रति भेजकर रीवा सेंट्रल जेल के तत्कालीन अधीक्षक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
मामले की जानकारी एडवोकेट जनरल को भी देने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा है कि यदि तब तक स्टेट बार काउंसिल के चुनाव के परिणाम घोषित हो जाते हैं, तो जांच निर्वाचित बार काउंसिल को सौंप दी जाए।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CRA-11293-2023
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