एमपी हाईकोर्ट ने कहा- टेंडर की शर्तें प्रथम दृष्टया पक्षपातपूर्ण, वर्क ऑर्डर जारी करने पर अंतरिम रोक
जबलपुर। मध्य प्रदेश के सांदीपनि स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म सप्लाई से जुड़े टेंडर पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने टेंडर का वर्क ऑर्डर जारी करने पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने प्रथम दृष्टया पाया कि टेंडर की कुछ शर्तें पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती हैं। इसी आधार पर अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान की।
₹10-12 करोड़ के टेंडर में ₹60 करोड़ टर्नओवर की शर्त को दी चुनौती
राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित सुविधि रेयन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने सांदीपनि स्कूलों में यूनिफॉर्म सप्लाई के लिए लगभग 10 से 12 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था।
याचिका के अनुसार, प्रारंभिक टेंडर शर्तों में गारमेंट और फैब्रिक निर्माता कंपनियों को भाग लेने की अनुमति थी, लेकिन बाद में शर्तों में बदलाव कर यह अनिवार्य कर दिया गया कि केवल वही कंपनी पात्र होगी, जिसका पिछले तीन वर्षों का कुल टर्नओवर 60 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो।
'चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बदली गईं शर्तें'
याचिकाकर्ता कंपनी का आरोप है कि टेंडर की पात्रता शर्तों में अचानक बदलाव कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। उनका कहना है कि 10–12 करोड़ रुपये के टेंडर के लिए 60 करोड़ रुपये का टर्नओवर मांगना अनुचित, मनमाना और प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के विपरीत है।
इन्हीं आधारों पर टेंडर की संशोधित शर्तों की वैधानिकता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
राज्य सरकार सहित चार अधिकारियों को बनाया पक्षकार
याचिका में मध्य प्रदेश सरकार, पाठ्य पुस्तक निगम के प्रबंध संचालक, सांदीपनि विद्यालय के निदेशक तथा लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त को पक्षकार बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसिल्वा और अधिवक्ता अभिषेक दिलराज ने दलीलें प्रस्तुत कीं। दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए टेंडर के वर्क ऑर्डर पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-20691-2026
