LAW'S VERDICT

सरकारी जमीन गंवाने वाले कलेक्टर व अन्य पर FIR दर्ज करें: MP हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

कलेक्टर से लेकर पटवारी तक पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई के निर्देश, कोर्ट बोला- सरकारी जमीन के ट्रस्टी हैं अधिकारी

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बैतूल जिले में करीब 5.5 हेक्टेयर सरकारी भूमि से जुड़े मामले में राज्य सरकार को बड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि लापरवाही के कारण सरकारी जमीन गंवाने वाले तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच और आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारी अधिकारियों की घोर लापरवाही से सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होता है, तो यह जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात है।

जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा अपील दाखिल करने में हुई 12 वर्ष की देरी को माफ करने से इनकार करते हुए निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया।

2004 के फैसले के खिलाफ 12 साल बाद दायर की गई थी अपील

मामला बैतूल जिले के सूरगांव स्थित लगभग 5.5 हेक्टेयर सरकारी भूमि से जुड़ा है। वर्ष 2004 में इस भूमि विवाद में सरकार के खिलाफ एकतरफा फैसला पारित हुआ था।

इसके बावजूद राज्य सरकार ने इस निर्णय को चुनौती देने के लिए 2016 में, यानी लगभग 12 साल बाद, अपील दायर की और देरी माफ करने का आवेदन प्रस्तुत किया। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, बैतूल ने 28 सितंबर 2016 को देरी माफ कर अपील स्वीकार कर ली थी।

इस आदेश को चुनौती देते हुए खंडवा जिले के नयाखेड़ा निवासी रामरती ने वर्ष 2017 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कार्तिक दुबे ने पैरवी की।

कोर्ट बोला- अधिकारी 12 साल तक सोते रहे

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारियों को मुकदमे की पूरी जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद सरकारी तंत्र ने 12 वर्षों तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया

अदालत ने टिप्पणी की कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के संवैधानिक दायित्व की अनदेखी है।

'सरकारी जमीन की ट्रस्टी है सरकार'

फैसले में हाईकोर्ट ने पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन (Public Trust Doctrine) का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार सरकारी भूमि और सार्वजनिक संसाधनों की ट्रस्टी (संरक्षक) है। सरकारी अधिकारी जनता के सेवक हैं और उनका दायित्व सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना है।

यदि उनकी लापरवाही के कारण सरकारी जमीन निजी हाथों में चली जाती है, तो यह जनता के विश्वास के साथ गंभीर विश्वासघात माना जाएगा।

FIR और विभागीय कार्रवाई के लिए सरकार को खुली छूट

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता दी कि वह इस मामले में लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच शुरू करे तथा आवश्यक होने पर आपराधिक प्रकरण (FIR) भी दर्ज कराए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करना सार्वजनिक हित और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए आवश्यक है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     CR-47-2017

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