LAW'S VERDICT

'तुम जैसे हजारों पति रख सकती हूँ' टिप्पणी को हाईकोर्ट ने माना उकसावा, यह हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन अपराध

पत्नी की मौत के मामले में MP हाईकोर्ट ने  उम्रकैद घटाकर 7 साल की सजा की 

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा जिले में पत्नी की हत्या के मामले में दोषी पति को बड़ी राहत देते हुए उसकी उम्रकैद की सजा घटाकर 7 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दी है। अदालत ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित हत्या नहीं थी, बल्कि पत्नी द्वारा की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद अचानक हुए उकसावे में आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया।

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषसिद्धि में संशोधन किया और सजा कम करने का आदेश दिया।

2021 में हुई थी वारदात

मामला छिंदवाड़ा जिले के चौरई थाना क्षेत्र के खैरा घाट का है। 18-19 जुलाई 2021 की रात आरोपी शिवा और उसकी गर्भवती पत्नी किरण के बीच विवाद हुआ। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने नशे की हालत में पत्नी पर पत्थरों से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

सजा कम करने के पीछे हाईकोर्ट के दो प्रमुख आधार

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दो महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख किया—

1. कथित टिप्पणी से अचानक हुआ उकसावा

अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा यह कहना कि "तुम जैसे हजारों पति रख सकती हूँ"  एक ऐसी टिप्पणी थी, जिसे आरोपी ने अपने आत्मसम्मान पर गंभीर आघात के रूप में लिया। कोर्ट के अनुसार, यह घटना अचानक हुए उकसावे की स्थिति में हुई और इससे आरोपी अपना आपा खो बैठा।

2. घटना के बाद आरोपी ने स्वयं पुलिस को दी सूचना

बेंच ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि वारदात के बाद आरोपी घटनास्थल से फरार नहीं हुआ। उसने स्वयं डायल-100 और अपने रिश्तेदारों को फोन कर घटना की जानकारी दी। अदालत ने कहा कि यदि हत्या पूर्व नियोजित होती, तो आरोपी का ऐसा व्यवहार सामान्यतः अपेक्षित नहीं होता।

हत्या की पूर्व योजना नहीं थी

हाईकोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने पहले से पत्नी की हत्या की योजना बनाई थी। हालांकि उसे यह ज्ञान अवश्य था कि पत्थर से हमला करने पर मृत्यु हो सकती है। इसी आधार पर अदालत ने मामले को हत्या के बजाय ऐसा अपराध माना, जिसमें मृत्यु होने की जानकारी तो थी, लेकिन हत्या का स्पष्ट इरादा सिद्ध नहीं हुआ।

इसके बाद हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को धारा 304 भाग-2 में परिवर्तित करते हुए आरोपी की सजा उम्रकैद से घटाकर 7 वर्ष कर दी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     CRA-1863-2024

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