राष्ट्रपति ने OBC एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के पत्र पर लिया संज्ञान
कॉलेजियम की अनुशंसाओं पर जताई आपत्ति
एसोसिएशन का कहना है कि 13 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट कॉलेजियम द्वारा हाईकोर्ट जज पद के लिए जिन अधिवक्ताओं के नामों की अनुशंसा की गई, उनमें ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला वर्ग को समुचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। संगठन ने आरोप लगाया है कि अनुशंसाओं में एक विशेष जाति और परिवारों के अधिवक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है।
अनुपातिक प्रतिनिधित्व की उठाई मांग
एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और सचिव विनायक प्रसाद शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी, एससी, एसटी और महिलाओं की आबादी तथा अधिवक्ताओं की संख्या के अनुपात में उच्च न्यायपालिका में उनका प्रतिनिधित्व नहीं दिखाई देता। उन्होंने न्यायपालिका में विविधता (Diversity) और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की है।
2022 के केंद्र सरकार के पत्र का भी दिया हवाला
एसोसिएशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2022 में केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से कॉलेजियमों को न्यायिक नियुक्तियों में विविधता और प्रतिनिधित्व पर विचार करने का आग्रह किया गया था। संगठन का कहना है कि इसी आधार पर पूर्व में कुछ अनुशंसाओं पर पुनर्विचार भी कराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख
एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा है कि न्यायपालिका में विविधता लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाती है और चयन प्रक्रिया में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
नोट: यह दावा OBC एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा पत्र को "याचिका के रूप में प्राप्त/पंजीकृत" किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि शिकायत के तथ्यों या आरोपों को स्वीकार या सत्यापित कर लिया गया है।
