हाईकोर्ट बोला- यह आने वाली पीढ़ियों को तबाह करने वाला संगठित अपराध
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) द्वारा उजागर किए गए कथित अंतरराष्ट्रीय मेफेड्रोन (MD ड्रग्स) तस्करी मामले में 3 आरोपियों की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपी को अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जोड़ते हैं और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।
61.20 किलो मेफेड्रोन बरामद होने का मामला
मामला भोपाल में डीआरआई द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें 61.20 किलोग्राम लिक्विड मेफेड्रोन बरामद किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये है। अंजलि सिंह राजपूत के साथ महफूज खान और वीरन रजनीकांत शाह ने भी जमानत अर्जियां दायर की थीं।
हवाला और केमिकल प्रीकर्सर सप्लाई के आरोप
अभियोजन के अनुसार, सूरत निवासी अंजलि सिंह राजपूत इस कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थी।
जांच में आरोप लगाया गया है कि—
- मुख्य सरगना के निर्देश पर वह भोपाल आकर 12 लाख रुपये की हवाला राशि के लेनदेन में शामिल हुई।
- उसने एक अज्ञात व्यक्ति से नकदी से भरा बैग लेकर बदले में '2-Bromo-4-Methyl Propiophenone' नामक रसायन वाला ट्रॉली बैग प्राप्त किया।
- यह रसायन मेफेड्रोन बनाने में उपयोग होने वाला प्रमुख प्रीकर्सर बताया गया है।
- बाद में यह बैग सह-आरोपी अब्दुल फैजल कुरैशी को सौंप दिया गया।
तुर्की से संचालित होने का दावा
डीआरआई की जांच के अनुसार, इस कथित नेटवर्क का मास्टरमाइंड सलीम डोला उर्फ अर्जुन सर है, जो फिलहाल फरार है और कथित रूप से तुर्की से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
अभियोजन ने दावा किया कि अंजलि सिंह राजपूत विभिन्न सिम कार्डों का उपयोग कर व्हाट्सएप और टेलीग्राम कॉल के माध्यम से विदेशी नंबर पर संपर्क में थी। जांच एजेंसी ने रेलवे टिकट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और चैट रिकॉर्ड को भी अपने मामले का हिस्सा बताया।
बचाव पक्ष की दलीलें नहीं मानी गईं
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अंजलि को केवल सह-आरोपी के कथित मेमोरेंडम बयान के आधार पर फंसाया गया है। उनके पास से कोई मादक पदार्थ या नकदी बरामद नहीं हुई तथा वह अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सीडीआर, व्हाट्सएप चैट ट्रांसक्रिप्ट और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज प्रथम दृष्टया आरोपी और कथित ड्रग नेटवर्क के बीच संबंध स्थापित करते हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जमानत अर्जी खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति से कम मात्रा में ड्रग्स मिलने का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि प्रथम दृष्टया एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का मामला है, जिसमें फाइनेंसर, सप्लायर, निर्माता और वितरक जैसी अलग-अलग भूमिकाएं दिखाई देती हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी समाज को गंभीर नुकसान पहुंचाती है और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अंजलि सिंह राजपूत की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-16725-2026
