5 हजार रुपये की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा था, विशेष अदालत ने सुनाया फैसला
जबलपुर। बिजली चोरी के प्रकरण को खत्म करने के नाम पर रिश्वत लेने वाले पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के तत्कालीन जूनियर इंजीनियर कमलेश कसेरा को लोकायुक्त की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए 4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।
बिजली चोरी का मामला खत्म करने मांगी थी 10 हजार की रिश्वत
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता सतीश चंद्र वंशकार ने 18 फरवरी 2021 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया कि 15 फरवरी 2021 को प्रेम सागर फीडर के जूनियर इंजीनियर कमलेश कसेरा ने शिकायतकर्ता के भाई की किराना दुकान की जांच की और बिजली चोरी का प्रकरण शिकायतकर्ता के पिता के नाम दर्ज किया।
इसके बाद आरोपी ने कथित रूप से मामला समाप्त करने के एवज में 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
पहले 5 हजार लिए, फिर ट्रैप में पकड़ा गया
शिकायत के अनुसार, आरोपी पहले ही 5 हजार रुपये ले चुका था। शेष 5 हजार रुपये देने के लिए शिकायतकर्ता ने दो-तीन दिन का समय मांगा और इसकी सूचना लोकायुक्त को दे दी।
योजना के अनुसार, जब आरोपी कांचघर स्थित जोन-2 कार्यालय में शेष 5 हजार रुपये की रिश्वत ले रहा था, तभी लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
लोकायुक्त ने सफलतापूर्वक किया अभियोजन
मामले में लोकायुक्त की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने पैरवी की। अदालत ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए चार वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
