मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दो सब इंजीनियरों के ट्रांसफर आदेश किए रद्द, कहा- अनुबंध में शर्त नहीं तो तबादला भी नहीं
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि संविदा सेवा कोई बंधुआ मजदूरी नहीं है और नियुक्ति अनुबंध में तबादले की शर्त शामिल न होने पर कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता। अदालत ने दो संविदा सब इंजीनियरों के तबादला आदेश निरस्त करते हुए राज्य सरकार की प्रशासनिक आवश्यकता संबंधी दलीलों को अस्वीकार कर दिया।
जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने कहा कि नियुक्ति के समय किए गए अनुबंध की शर्तों को बाद में जारी किसी सरकारी परिपत्र (सर्कुलर) के आधार पर एकतरफा नहीं बदला जा सकता।
जबलपुर और सिवनी के सब इंजीनियरों ने दी थी चुनौती
मामले में याचिकाकर्ता Mukesh Kumar Upadhyay (जबलपुर) और Mukesh Bisen (सिवनी) ने 15 जून 2026 के तबादला आदेश को चुनौती दी थी। आदेश के तहत दोनों को क्रमशः छतरपुर और ग्वालियर स्थानांतरित किया गया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अर्णव तिवारी ने अदालत को बताया कि नियुक्ति के मूल अनुबंध में कहीं भी स्थानांतरण की शर्त नहीं थी, इसलिए तबादला आदेश मनमाना और अवैध है।
सरकार ने 2020 के सर्कुलर का दिया हवाला
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष में 24 फरवरी 2020 के सरकारी परिपत्र के क्लॉज 9.1 का उल्लेख किया गया। सरकार ने तर्क दिया कि विशेष प्रशासनिक परिस्थितियों में संविदा कर्मचारियों का भी स्थानांतरण किया जा सकता है।
हालांकि अदालत ने पूछा कि यदि यह प्रावधान केवल विशेष परिस्थितियों के लिए है, तो सरकार यह बताने में क्यों विफल रही कि इस मामले में ऐसी कौन-सी असाधारण या आपात प्रशासनिक स्थिति मौजूद थी, जिसके कारण तबादला आवश्यक हो गया।
‘पुराने अनुबंध की शर्तें बाद में नहीं बदली जा सकतीं’
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2016 के मूल अनुबंध में स्थानांतरण का कोई प्रावधान नहीं था। ऐसे में बाद में जारी किसी प्रशासनिक सर्कुलर के आधार पर संविदा कर्मचारियों पर नई शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संविदा कर्मचारी किसी बंधुआ व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं और उनके साथ अनुबंध की शर्तों के विपरीत व्यवहार नहीं किया जा सकता।
सरकार को दी भविष्य के लिए छूट
कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं के तबादला आदेश निरस्त कर दिए। साथ ही सरकार को यह स्वतंत्रता भी दी कि वर्तमान अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद यदि नया अनुबंध या नवीनीकरण किया जाता है, तो उसमें स्थानांतरण संबंधी शर्त शामिल कर सकती है और उसके अनुरूप भविष्य में आदेश जारी कर सकती है।
फैसले का व्यापक असर
यह निर्णय प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि उनकी नियुक्ति के मूल अनुबंध में स्थानांतरण का प्रावधान नहीं है, तो इस फैसले का हवाला देकर वे मनमाने तबादलों को चुनौती दे सकते हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-20775-2026
