LAW'S VERDICT

विजिलेंस की ‘गलती’ उजागर! 10 रुपये के आरोप में बर्खास्त टीटी को 24 साल बाद मिला इन्साफ

कैट के बाद मप्र हाईकोर्ट के फैसले से टीटी की बहाली का रास्ता साफ

जबलपुर।  महज 10 रुपये के कथित हेरफेर के आरोप में एक रेलवे टीटी को नौकरी से बर्खास्त करना आखिरकार विभाग को भारी पड़ गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए विजिलेंस विभाग की पूरी कार्रवाई को अवैध और नियमों के खिलाफ ठहरा दिया। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की की डिवीजन बेंच के इस फैसले के बाद 24 साल बाद टीटी की बहाली का रास्ता साफ हो गया है।

10 रुपए ज्यादा लेने का था विवाद 

घटना 4 जनवरी 2001 की है, जब श्रीधाम से जबलपुर के बीच ट्रेन में यात्रा कर रहे एक यात्री ने आरोप लगाया कि टीटी नारायण नायर ने 31 रुपये की जगह 21 रुपये लौटाए। हालांकि टीटी का साफ कहना था कि उन्होंने पूरे 31 रुपये ही लौटाए थे। इसी दौरान ट्रेन में विजिलेंस टीम ने छापा मारकर मामले की जांच शुरू कर दी।

बिना सुनवाई के बर्खास्तगी

  • विजिलेंस जांच के दौरान टीटी के जवाब पर ठीक से विचार नहीं किया गया
  • विभाग ने 15 मार्च 2002 को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया
  • अपील में भी आरोप साबित नहीं हो सके

न्याय न मिलने पर नारायण नायर ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में एक मामला वर्ष 2002 में दाखिल किया था।

CAT से राहत, हाईकोर्ट ने भी लगाई मुहर

CAT ने 16 जुलाई 2004 को नारायण नायर की बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके खिलाफ रेलवे ने हाईकोर्ट में यह अपील वर्ष 2005 में दायर की थी। सुनवाई के दौरान टीटी नारायण नायर की ओर से अधिवक्ता आकाश चौधरी ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद दिए फैसले में डिवीज़न बेंच ने इस मामले में विजिलेंस की जांच में गंभीर खामियां पाईं। बेंच ने जांच अधिकारी द्वारा अभियोजन की भूमिका निभाने को गलत बताया और याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका न देने को भी  अवैध माना। कोर्ट ने CAT के फैसले को सही ठहराते हुए रेलवे की अपील खारिज कर दी

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच निष्पक्ष और नियमसम्मत होनी चाहिए। छोटे आरोपों में भी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है। इस फैसले के बाद टीटी नारायण नायर की बहाली का रास्ता साफ हो गया है। उन्हें पिछले 24 सालों के अन्य लाभ भी मिल सकते हैं।  


हाईकोर्ट का आदेश देखें   WPS-1178-2005

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