जबलपुर | मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2025 की मुख्य परीक्षा का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीब 15 महीने से लागू अंतरिम स्थगन आदेश (Stay Order) हटा दिया है, जिससे अब आयोग मुख्य परीक्षा आयोजित कराने के लिए स्वतंत्र हो गया है। यह राहत प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनकी परीक्षा लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया के कारण रुकी हुई थी।
याचिकाकर्ताओं ने ही स्टे हटाने का किया अनुरोध
मामले की खास बात यह रही कि मुख्य परीक्षा पर लगी रोक को हटाने की मांग स्वयं याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने की। उन्होंने अदालत को बताया कि कानूनी विवाद अपनी जगह जारी रह सकता है, लेकिन उसके कारण हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसलिए अंतरिम रोक समाप्त कर परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी जाए।
कट-ऑफ और आरक्षण नियमों को लेकर दायर हुई थी याचिका
विवाद की शुरुआत MPPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 के परिणाम से हुई थी। भोपाल की ममता डेहरिया व अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि आयोग ने वर्गवार (Category-wise) कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए और आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को अनारक्षित (General) सीटों पर माइग्रेट करने के नियमों का सही पालन नहीं किया।
इन्हीं मुद्दों को चुनौती देते हुए WP/09253/2025 एवं WP/11444/2025 दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान मार्च और अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट ने मुख्य परीक्षा के आयोजन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
सरकार और आयोग के जवाबों से बढ़ी सुनवाई में देरी
सुनवाई के दौरान MPPSC ने सीलबंद लिफाफे में कट-ऑफ सूची अदालत के समक्ष प्रस्तुत की थी तथा जुलाई 2025 में स्टे हटाने का आवेदन भी दिया था। हालांकि, अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क दिया गया कि सरकार और आयोग द्वारा दाखिल जवाब अधूरे तथा अस्पष्ट थे, जिसके कारण मामले की अंतिम सुनवाई लगातार टलती रही और परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी।
कोर्ट ने आयोग को परीक्षा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए
गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष मामला सूचीबद्ध था। सुनवाई का नंबर देर शाम तक नहीं आने पर याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बेंच से अनुरोध किया कि छात्रों के हित को देखते हुए अंतरिम रोक तत्काल हटाई जाए।
अदालत ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता को परीक्षा आयोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्य परीक्षा पर लगा स्थगन आदेश समाप्त कर दिया गया।
आरक्षित वर्ग के अधिकारों पर सुनवाई जारी रहेगी
हालांकि, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के अधिकारों, कट-ऑफ निर्धारण और मेरिट माइग्रेशन से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर सुनवाई अभी समाप्त नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को निर्धारित की है।
प्रमुख पक्षकार
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और पुष्पेंद्र कुमार शाह ने पैरवी की। वहीं MPPSC की ओर से अधिवक्ता पराग तिवारी उपस्थित रहे।
