LAW'S VERDICT

अवैध कॉलोनी मामले में कॉलोनाइजर को हाईकोर्ट से राहत, कलेक्टर के एफआईआर आदेश पर रोक

हाईकोर्ट ने माना: अवैध कॉलोनी मामलों में दंड देने का अधिकार अदालत को, कलेक्टर को नहीं

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा जिले में अवैध कॉलोनी विकसित करने के आरोप में एक कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने संबंधी कलेक्टर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस विशाल मिश्रा की वेकेशन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

मामला छिंदवाड़ा जिले के चौरई निवासी जितेंद्र चौरे से जुड़ा है। उन्होंने 13 मई 2024 को पारित उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें छिंदवाड़ा कलेक्टर ने उन्हें अवैध कॉलोनाइजर बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। विवाद एक हेक्टेयर से अधिक भूमि पर विकसित की जा रही कॉलोनी से संबंधित है।

कॉलोनी विकास नियमों का हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा और विकास संटू ने दलील दी कि कॉलोनी विकास नियम, 2021 के नियम-22 तथा मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 339-सी के अनुसार अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में दंड और जुर्माना लगाने का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय को है।

वकीलों ने कोर्ट को बताया कि नियम-22(4) के तहत सक्षम प्राधिकारी केवल शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया कर सकता है, जबकि धारा 339-सी(3) के अनुसार दोषसिद्धि होने पर सजा और जुर्माना लगाने का अधिकार अदालत के पास है। ऐसे में कलेक्टर और एसडीओ (राजस्व) द्वारा पारित आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

राज्य पक्ष नहीं कर सका विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए कानूनी बिंदुओं का प्रभावी खंडन नहीं कर सके। इस पर कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामला विचारणीय मानते हुए कलेक्टर के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।

समान मामलों के साथ होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब पेश करने तथा आवश्यकता होने पर स्थगन निरस्तीकरण आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता दी है। साथ ही इस याचिका को अवैध कॉलोनियों से जुड़े अन्य लंबित मामलों के साथ समान रूप से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।

क्या कहा हाईकोर्ट ने?

कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह सवाल विचारणीय है कि क्या कलेक्टर और एसडीओ को ऐसे मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज कराने और दंडात्मक कार्रवाई के आदेश देने का अधिकार है, जबकि कानून में दंड निर्धारित करने का अधिकार न्यायालय को दिया गया है।

मुख्य बिंदु

  • छिंदवाड़ा के कॉलोनाइजर को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत।
  • कलेक्टर के एफआईआर दर्ज कराने संबंधी आदेश पर रोक।
  • कॉलोनी विकास नियम 2021 और नगर पालिका अधिनियम 1961 का दिया गया हवाला।
  • याचिकाकर्ता का दावा— दंड और जुर्माना लगाने का अधिकार केवल कोर्ट को।
  • हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
  • मामला अवैध कॉलोनियों से जुड़े अन्य मामलों के साथ सुना जाएगा।

हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-19074-2026

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