LAW'S VERDICT

विजय माल्या की कंपनी से जुड़ी जमीन पर बवाल—तीन दावेदार, हाईकोर्ट में टकराव

किसानों का है जमीन पर कब्ज़ा, हाईकोर्ट ने दिए यथास्थिति बनाये रखने के निर्देश 

जबलपुर। भोपाल के सरवर गांव की 20 एकड़ जमीन पर स्वामित्व को लेकर बड़ा विवाद अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। इस जमीन पर तीन अलग-अलग पक्षों—किसानों, विजय माल्या से जुड़ी कंपनी और एक निजी पैकेजिंग कंपनी—ने दावा ठोक दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने रजिस्ट्री की मूल प्रति पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को होगी

यह विवाद उस जमीन को लेकर है, जिस पर तीन किसान (सोमेश्वर प्रसाद चक्रधारी, मोहम्मद कासिम, सैमसन डिसूजा) खेती करने का दावा कर रहे हैं। United Spirits Limited (पूर्व में मैकडॉवेल स्पिरिट्स) स्वामित्व का दावा कर रही है। वहीं हर्ष पैकेजिंग कंपनी खुद को वैध खरीदार बता रही है। 

किसानों ने किया है दावा

आवेदक किसानों के अनुसार जमीन के मूल मालिक कैलाश बाजपेयी ने 1999 में 16 एकड़ जमीन उन्हें खेती के लिए दी थी। तब से वे लगातार उस जमीन पर खेती कर रहे हैं। नामांतरण प्रक्रिया में उन्हें न नोटिस मिला, न सुनवाई का मौका। इस आधार पर उन्होंने स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) के लिए दीवानी वाद दायर किया है। 

विजय माल्या से जुड़ी है कंपनी  

शेष 4 एकड़ जमीन पर पहले विटारी डिस्टिलरीज लिमिटेड की डिस्टिलरी थी । वर्ष 2001 में इसका विलय विजय माल्या से जुडी मैकडॉवेल स्पिरिट्स में हुआ, जो बाद में United Spirits Limited बनी। 2023 में कंपनी ने निविदा के जरिए पूरी जमीन बेची। हर्ष पैकेजिंग ने 8.03 करोड़ रुपये देकर विक्रय विलेख (Sale Deed) कराया। 

क्या है विवाद की असली जड़

राजस्व रिकॉर्ड  अभी भी विटारी डिस्टिलरीज के नाम पर है। तहसीलदार ने पहले नामांतरण यूनाइटेड स्पिरिट्स के नाम किया, फिर उसे रोककर कानूनी राय मांगी। इसी कारण सब-रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री दर्ज करने से इनकार कर दिया। नामांतरण प्रक्रिया पर सवाल उठाकर तीनों किसानों ने यह मामला हाईकोर्ट में मामला दाखिल किया है। 

6वीं पेशी पर भी सेल डीड पेश नहीं 

किसानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर, अधिवक्ता अनुराग गोहिल व भूपेश तिवारी ने दलीलें रखीं। बेंच ने पाया कि पिछली 5 पेशियों पर हर्ष पैकेजिंग कंपनी को सेल डीड पेश करने की मोहलत दी गई थी, जो छठवीं सुनवाई पर भी नहीं पेश की गई। जमीन पर किसानों का कब्जा होने के मद्देनजर डिवीज़न बेंच ने जमीन के स्वामित्व और कब्जे पर यथा स्थिति बनाये रखने के अंतरिम आदेश दिए।

अब आगे क्या होगा?

अब पूरे मामले का केंद्र रजिस्ट्री की वैधता और नामांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर आ गया है। 24 जून की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि जमीन का असली मालिक कौन है और किसका दावा कानूनी रूप से मजबूत है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    WA-2267-2025

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