हाईकोर्ट ने घुघरी थाने के टीआई के साथ मंडला के एसपी को सही रिपोर्ट के साथ किया तलब
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक चौंकाने वाली लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए मण्डला जिले के घुघरी थाना प्रभारी (टीआई) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को तलब कर लिया है। मामला इतना गंभीर निकला कि कोर्ट ने इसे “लापरवाही और घोर असावधानी की पराकाष्ठा” करार दिया।मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने दोनों अधिकारियों को 17 अप्रैल 2026 को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, यह पूरा मामला एक आरोपी को अस्थायी जमानत (टेम्पररी बेल) देने की मांग से जुड़ा है। घुघरी थाना क्षेत्र के देवीस्थल मोहल्ला निवासी अन्नू वनवासी को एक नाबालिग से दुराचार के मामले में मण्डला की विशेष अदालत ने 17 अक्टूबर 2024 को 20 साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में अपील दायर की, जो अभी विचाराधीन है।
आरोपी ने भाई की शादी के लिए मांगी जमानत
अपील लंबित होने के दौरान आरोपी की ओर से एक आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें कहा गया कि उसके भाई अनिल वनवासी की शादी 18 अप्रैल 2026 को होने वाली है। इस आधार पर आरोपी को अस्थायी जमानत देने की मांग की गई, ताकि वह पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल हो सके। कोर्ट ने इस दावे की पुष्टि के लिए घुघरी थाना प्रभारी से वेरिफिकेशन रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन यहीं पर पूरा मामला पलट गया।
टीआई ने कहा- 18 को है आरोपी की शादी
थाना प्रभारी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में यह उल्लेख कर दिया गया कि अन्नू वनवासी (आरोपी) की ही शादी 18 अप्रैल को गायत्री रौतेले से हो रही है। रिपोर्ट की अंतिम पंक्ति में भी यही बात दोहराई गई। जब यह रिपोर्ट कोर्ट के सामने आई, तो बेंच ने तुरंत गौर किया कि यह तथ्य आवेदन से पूरी तरह उलट है। आवेदन में स्पष्ट रूप से भाई अनिल की शादी का उल्लेख था, जबकि पुलिस रिपोर्ट में आरोपी अन्नू की शादी बता दी गई।
यह गंभीर लापरवाही की पराकाष्ठा: हाईकोर्ट
टीआई की इस स्पष्ट विरोधाभासी रिपोर्ट को देखते हुए कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर लापरवाही की पराकाष्ठा का है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की गलत रिपोर्ट न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
एसपी को सही रिपोर्ट देने के निर्देश
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार विश्वकर्मा उपस्थित हुए, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिषेक सिंह ने पक्ष रखा। कोर्ट ने घुघरी थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया, साथ ही मण्डला एसपी को भी निर्देशित किया कि वे सही और तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ कोर्ट में पेश हों। डिवीजन बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले को अगले दिन पहले केस के रूप में सुना जाएगा, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि कोर्ट इस लापरवाही को लेकर बेहद गंभीर है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
यह घटनाक्रम पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर जहां अदालत संवेदनशील मामलों में तथ्यों की सटीकता पर निर्भर करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की गलत रिपोर्ट न केवल न्याय में बाधा डाल सकती है, बल्कि आरोपी को अनुचित लाभ या नुकसान भी पहुंचा सकती है।
अब निगाहें 17 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां टीआई और एसपी को कोर्ट के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यह मामला आने वाले समय में पुलिस जवाबदेही और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CRA-5514-2025
