600 परिवारों की ओर से एक महिला ने दाखिल की जनहित याचिका, भड़पुरा में बुनियादी सुविधाएं न होने का लगाया आरोप
जबलपुर। मदन महल पहाड़ी से सैकड़ों गरीब परिवारों को बिना बुनियादी सुविधाओं के उजाड़ने की कार्रवाई पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल रोक लगा दी है। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि बिना मूलभूत सुविधाएं दिए विस्थापन स्वीकार्य नहीं होगा।
यह मामला गढ़ा के रानी दुर्गावती वार्ड निवासी एक महिला द्वारा दायर जनहित याचिका के जरिए कोर्ट के सामने आया। याचिका में बताया गया कि मार्च 2026 से जिला प्रशासन मदन महल पहाड़ी क्षेत्र में निवास कर रहे करीब 600 परिवारों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। इन परिवारों को ग्राम तेवर के पास स्थित भड़पुरा गांव में बसाने की योजना बनाई गई है, लेकिन वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है।
न बिजली और न है पानी
याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिस स्थान पर इन लोगों को पुनर्वासित किया जा रहा है, वहां न तो पक्के मकान हैं, न पीने के पानी की व्यवस्था, न बिजली और न ही अन्य जरूरी सुविधाएं। ऐसे में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को एक तरह से उजाड़कर सुनसान जगह पर छोड़ दिया जा रहा है। याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रभावित लोग पुनर्वास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें कम से कम मानवीय जीवन जीने के लिए जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
मनमानीपूर्ण हो रही कार्रवाई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कृष्ण शरण कौरव ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई मनमानी है और बिना किसी ठोस व्यवस्था के लोगों को विस्थापित किया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता निलेश यादव कोर्ट में उपस्थित हुए और समय की मांग की।
पुनर्वास कागजों पर नहीं जमीन पर दिखे
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य सरकार शपथ-पत्र दाखिल कर यह बताए कि मदन महल क्षेत्र के निवासियों को आखिर किस स्थान पर बसाया जा रहा है और वहां कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए।
पूरी कार्रवाई पर लगाई रोक
सबसे अहम बात यह रही कि डिवीजन बेंच ने अंतरिम राहत देते हुए विस्थापन की पूरी कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही, सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई के लिए 18 अप्रैल 2026 की तारीख तय की गई है।
प्रभावित परिवारों को मिली राहत
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से उन प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कुछ समय से अनिश्चितता और भय के माहौल में जी रहे थे। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास के नाम पर गरीबों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को अपने दावों और व्यवस्थाओं का पूरा ब्यौरा कोर्ट के सामने रखना होगा।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-12811-2026
