कार्यकाल खत्म होने के बाद भी हाईकोर्ट ने बरकरार रखे 5 सदस्यों के पद, 20 और मामलों पर जल्द होगी सुनवाई
जबलपुर | उपभोक्ता आयोगों में कामकाज ठप होने की आशंका के बीच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और व्यावहारिक फैसला सुनाया है। जस्टिस मनिंदर एस भट्टी की कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा- जब फोरम में अध्यक्ष और सदस्य ही नहीं रहेंगे तो उनका क्या औचित्य रह जाएगा। बेंच ने 5 सदस्यों को राहत देते हुए कहा है कि नई नियुक्तियां होने तक मौजूदा अध्यक्ष और सदस्य पद पर बने रहेंगे, भले ही उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका हो। हाईकोर्ट का ये आदेश अभी 5 सदस्यों की याचिकाओं पर आया है। अभी 20 और याचिकाओं पर सुनवाई होना बाकी है।
5 सदस्यों ने लगाई है याचिका
हाईकोर्ट में ये याचिकाएं मंडला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य डॉ. प्रसन्न कुमार दुबे, श्योपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सदस्य संगीता बंसल, पन्ना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य उमेश कुमार पटेल, भिंड जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सदस्य डॉ. मीना शर्मा और मंडला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की सदस्य डॉ. मुक्ता जोशी द्वारा दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने राहत मांगते हुए कहा कि जब तक नए नियम लागू नहीं होते और नई नियुक्तियां नहीं हो जातीं, तब तक उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति दी जाए।
सुको के फैसले का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें Consumer Protection Rules, 2020 के Rule 10(2) को निरस्त किया गया था। इस फैसले के कारण नई नियुक्तियों की प्रक्रिया फिलहाल अटकी हुई है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ताओ का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
तो ठप्प हो जाएगा फोरम का कामकाज
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि वहां पर यदि अध्यक्ष और सदस्य नहीं रहेंगे तो उपभोक्ता फोरम में न्यायिक कामकाज ठप हो जाएगा। इससे आम नागरिकों के मामलों के निपटारे पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक ऐसे ही मामले का भी हवाला दिया, जहां ऐसी स्थिति में पदाधिकारियों को जारी रखने की अनुमति दी गई थी।
