मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, अब सोमवार की सुनवाई में तय होगा 19 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला
जबलपुर | मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के 12 मई को होने वाले चुनाव से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कुल 138 उम्मीदवारों में से 19 के नामांकन फॉर्म निरस्त कर दिए गए हैं, जिसके बाद हाईकोर्ट परिसर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। मामला अब Supreme Court of India तक पहुंच चुका है, जहां इस फैसले को चुनौती देने वाली दो विशेष अनुमति याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई होगी। इसी बीच, मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो जाने पर बार कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने स्पेशल कमेटी का गठन करके महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को कमेटी का अध्यक्ष बनाया है।
किन-किन कारणों से निरस्त हुए नामांकन
काउंसिल के आदेश के अनुसार:
- 11 उम्मीदवार बार के पदाधिकारी होने के कारण अयोग्य घोषित किये गए।
- 3 उम्मीदवारों पर अनुशासनात्मक समिति में प्रकरण लंबित हैं।
- 5 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले लंबित
इनमें जबलपुर के 4 उम्मीदवार धन्य कुमार जैन, पारितोष त्रिवेदी, मनीष मिश्रा और ज्योति राय के नामंकन दूसरे बार एसोसिएशन में पदाधिकारी होने के कारण निरस्त किये गए हैं।
जैन का आरोप- “यह सोची-समझी साजिश”
नामंकन पत्र निरस्त होने के बाद शुक्रवार को मप्र हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. जैन, सचिव परितोष त्रिवेदी, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष मिश्रा और पदाधिकारी ज्योति राय ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। श्री जैन ने बार कॉउन्सिल के निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कार्रवाई पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा है। कुछ उम्मीदवार नहीं चाहते कि हम लोग चुनकर स्टेट वार पहुंचे। यदि हम जीतकर वहां पहुँचते तो उन लोगों को बार कॉउन्सिल में हुए कारनामों की पोल खुलने का अंदेशा था। श्री जैन का कहना है कि जिस नियम के आधार पर नामांकन खारिज किए गए, वह 2016 से लागू है, लेकिन अब तक कभी इस तरह लागू नहीं किया गया।
“निर्वाचन कमेटी दे इस्तीफा” –मिश्रा
उम्मीदवार मनीष मिश्रा ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले वैध घोषित फॉर्म बाद में निरस्त किए गए। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी हुई है। प्रदेश के 1.52 लाख वकीलों में से सिर्फ 85 हजार को ही वोटर लिस्ट में शामिल किया गया। उन्होंने मांग की कि निर्वाचन कमेटी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे और नई टीम चुनाव कराए।
जस्टिस धूलिया कमेटी के आधार पर कार्रवाई
वहीं चुनाव के लिए गठित विशेष समिति के सचिव प्रशांत दुबे के अनुसार, उम्मीदवारों के नामंकन निरस्त करने का फैसला जस्टिस धूलिया कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जस्टिस धूलिया कमेटी, राष्ट्रीय स्तर की कमेटी है और उसके द्वारा लिए गए निर्णय सभी राज्यों के रिटर्निंग ऑफिसर व चुनाव समिति के लिए बाध्यकारी हैं।
BCI ने नई कमेटी बनाई, महाधिवक्ता को बनाया अध्यक्ष
मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद Bar Council of India ने एक नई कमेटी गठित की है। इसमें महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को अध्यक्ष, दीपेन्द्र कुशवाहा (अतिरिक्त महाधिवक्ता, ग्वालियर) और सुयश मोहन गुरु (डिप्टी सॉलिसिटर जनरल) को सदस्य बनाया गया है। प्रशांत सिंह ने शुक्रवार को ही अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल लिया है और परिषद में उनका स्वागत किया गया।
अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर
इस पूरे विवाद ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को Supreme Court of India में होने वाली सुनवाई से तय होगा कि नामांकन रद्द करने का फैसला कायम रहेगा या फिर चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

