जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा संदेश देते हुए जबलपुर के उद्योगपति महेश केमतानी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकल पीठ ने यह जुर्माना उनकी आर्थिक स्थिति (हैसियत) को ध्यान में रखते हुए तय किया।
अदालत ने साफ कहा किपहले एफआईआर दर्ज कराना और फिर बाद में समझौता कर लेना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जो कानून के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।
97 लाख के गबन का है मामला
यह पूरा मामला जबलपुर के महानद्दा स्थित शुभ मोटर्स से जुड़ा है। शिकायतकर्ता: महेश केमतानी ने संदीप कुमार मिश्रा, नेहा विश्वकर्मा और नसीम खान उर्फ मुस्कान पर करीब 97 लाख रुपये की हेराफेरी (गबन) का आरोप लगाते हुए मदन महल थाने में FIR दर्ज कराई थी। जांच के दौरान संदीप मिश्रा के परिवार से करीब 12 लाख रुपये की रिकवरी भी हुई थी।
आरोपी ने लगाए जमानत अर्जी
गिरफ्तार आरोपी संदीप मिश्रा ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि संदीप मिश्रा का शिकायतकर्ता से समझौता हो चुका है। वहीं शासन की ओर से पैनल अधिवक्ता हिमांशु तिवारी ने इसका विरोध किया। श्री तिवारी ने तर्क दिया कि FIR के बाद समझौता करना कानून का दुरुपयोग है और इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने दी आरोपी को जमानत
अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी संदीप मिश्रा को जमानत दे दी। साथ ही समझौता करने के कारण शिकायतकर्ता महेश केमतानी पर 50,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया। यह राशि एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में जमा करनी होगी।
क्यों अहम है यह फैसला?
हाईकोर्ट का यह फैसला एक बड़ा संकेत है कि:
- कोर्ट अब फर्जी या दबाव में किए गए समझौतों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
- आर्थिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सम्मान जरूरी है।
- FIR का इस्तेमाल “टूल” की तरह करने वालों पर सख्ती बढ़ेगी।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-53735-2025
