हाईकोर्ट ने SDO का फैसला किया रद्द, मामला फिर से सुनवाई के लिए वापस भेजा
जबलपुर | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीमांकन विवाद के एक अहम मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ दो लाइन के आदेश से 5 साल की देरी को माफ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने उमरिया के एसडीओ द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया। जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने कहा:
- राजस्व मामलों में अपील की 45 दिन की समयसीमा (Limitation) तय है।
- इतनी लंबी देरी को बिना ठोस कारण के माफ करना गलत है।
- मात्र औपचारिक आदेश देकर न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा सकता।
जमीन के सीमांकन से जुड़ा है मामला
मामला उमरिया जिले के पाली क्षेत्र की निवासी कमला जायसवाल से जुड़ा है। 8 मई 2018 को उनकी जमीन का सीमांकन हुआ। रेवेन्यू इंस्पेक्टर ने सीमांकन को स्वीकार किया। वर्ष 2024 में पड़ोसी पक्ष (रामचंद्र जायसवाल व अन्य) ने सीमांकन को SDO के समक्ष चुनौती दी। SDO ने 20 नवंबर 2024 को सीमांकन निरस्त कर दिया।इसके बाद मामला एडिशनल कलेक्टर तक गया, लेकिन राहत न मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
5 साल की देरी, सिर्फ 2 लाइन में माफ
हाईकोर्ट ने पाया कि अपील करीब 5 साल की देरी से दायर की गई थी। SDO ने बिना विस्तृत कारण बताए सिर्फ 2 लाइन के आदेश में देरी माफ कर दी। इस तरह का आदेश कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामला फिर SDO को भेजा गया
राजस्व मामलों में अहम संदेश
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि मुकदमों में समयसीमा (Limitation) का पालन अनिवार्य है। बिना ठोस कारण के देरी माफ नहीं की जा सकती और न्यायिक आदेशों में पर्याप्त तर्क होना जरूरी है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MP-2930-2025
