LAW'S VERDICT

सौतेले पिता ने नाबालिग बेटी को बनाया हवस का शिकार, हाईकोर्ट ने 16 साल पुरानी उम्रकैद की सजा रखी बरकरार

पीड़िता के बयान पर पूरा भरोसा जताकर खारिज की आरोपी की अपील 

जबलपुर | रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक सनसनीखेज मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सौतेले पिता को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि दुष्कर्म पीड़िता के बयान पूरी तरह विश्वसनीय हैं और मेडिकल रिपोर्ट्स से उनकी पुष्टि होती है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि:

- पीड़िता और उसकी बहन के बयान भरोसेमंद हैं। 

- मेडिकल साक्ष्य इन बयानों की पुष्टि करते हैं। 

- ऐसे मामलों में पीड़िता की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। 

अदालत ने साफ किया कि सभी सबूत आरोपी के खिलाफ मजबूत हैं, इसलिए सजा पूरी तरह उचित है।

वर्ष 2009 की घटना, 2010 में हुई थी सजा  

यह मामला सतना जिले का है, जहां आरोपी सोनू उर्फ मोहम्मद हफीज के खिलाफ वर्ष 2009 में दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। पीड़िता की मां (आरोपी की पत्नी) ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला अपने पहले पति की मौत के बाद आरोपी के साथ रह रही थी। 5 अक्टूबर 2009 को पीड़िता ने मां को घटना की जानकारी दी थी। मामले की ट्रायल के बाद जिला सत्र न्यायालय ने 29 अक्टूबर 2010 को आरोपी को दोषी पाकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

आरोपी की दलील खारिज

हाईकोर्ट में आरोपी ने दलील दी कि पीड़िता नाबालिग है और उसके बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। पीड़िता ने जिरह के दौरान स्पष्ट कहा कि “मेरे साथ गलत काम किसी और ने नहीं, बल्कि मेरे सौतेले पिता ने ही किया है।”

बहन की गवाही बनी अहम कड़ी

पीड़िता की छोटी बहन ने भी सत्र न्यायालय में गवाही देते हुए बताया कि आरोपी पिता ने उसे और भाइयों को कमरे से बाहर कर दिया था। इसके बाद अंदर दरिंदगी को अंजाम दिया गया। पीड़िता की छोटी बहन की इस गवाही ने मामले को और मजबूत बना दिया।

हाईकोर्ट ने अपील खारिज की

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा। 


हाईकोर्ट का आदेश देखें     CRA-2332-2010

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