LAW'S VERDICT

सरकार ने खुद खोला pandora box, अब जिम्मेदारी से पल्ला झड़ने की कोशिश कर रही

नगर परिषद श्योपुर के अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़े मामले पर हाईकोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी, भारी मन से मुख्य सचिव को जांच रिपोर्ट पेश करने दी मोहलत 

ग्वालियर।  पूर्व में दिए आदेश के बाद भी श्योपुर कलेक्टर और चम्बल संभागायुक्त के खिलाफ जांच करके रिपोर्ट पेश न किये जाने पर मप्र हाईकोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने कहा- 'राज्य सरकार ने खुद ही इस मामले में “Pandora Box” खोल दिया है, और अब Order VII Rule 11 CPC के तहत दायर आवेदन की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की जा रही है। राज्य सरकार के अड़ियल रवैये के कारण इस मामले की सुनवाई टलती जा रही है। हमें इस बात में बिलकुल भी रुचि नहीं है कि सरकार अपने किसी अधिकारी या सरकारी अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई करती है या नहीं, बल्कि हमारा उद्देश्य तो मामले का अंतिम निपटारा करना है।' इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने भारी मन से महाधिवक्ता के आग्रह पर मुख्य सचिव को दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच करके रिपोर्ट पेश करने कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी।

चुनाव याचिका खारिज होने से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, नगर परिषद श्योपुर के अध्यक्ष पद पर रेनू गर्ग के वर्ष 2022 में हुए चुनाव को चुनौती देते हुए सुमेर सिंह ने प्रधान जिला न्यायाधीश, श्योपुर की अदालत में चुनाव याचिका दायर की थी। प्रतिवादी पक्ष ने Order 7 Rule 11 CPC के तहत आवेदन लगाकर कहा कि चुनाव याचिका राजपत्र (Gazette) अधिसूचना से पहले दायर की गई थी। याचिका का वेरिफिकेशन विधि अनुसार नहीं किया गया और आवश्यक सिक्योरिटी राशि की रसीद संलग्न नहीं थी। इन आधारों पर ट्रायल कोर्ट ने आवेदन स्वीकार करते हुए सुमेर सिंह की चुनाव याचिका 1 फरवरी 2024 को खारिज कर दी, जिसके खिलाफ यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

कलेक्टर की भूमिका पर कोर्ट के सवाल

इस मामले पर 19 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने श्योपुर के कलेक्टर/रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि मुख्य सचिव यह स्पष्ट करें कि क्या रिटर्निंग ऑफिसर को ऐसे OIC (Officer-in-Charge) के माध्यम से प्रतिनिधित्व कराया जा सकता है जिसे निर्वाचन आयोग ने नियुक्त नहीं किया हो? और, जब तक चुनाव की अधिसूचना Official Gazette में प्रकाशित न हो जाए, तब तक निर्वाचित उम्मीदवार पदभार नहीं ले सकता। फिर भी कलेक्टर ने एमपी नगर पालिका अधिनियम की धारा 55 के तहत पहली बैठक के तुरंत बाद ही उसे पदभार ग्रहण करने की अनुमति क्यों दी?

कमिश्नर के आचरण की भी जांच के निर्देश 

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को यह भी निर्देश दिया कि वे चम्बल के संभागायुक्त सुरेश कुमार द्वारा इस मामले में अपनाये गए आचरण की भी जांच करें और यह बताएं कि क्या उन्होंने अदालत और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य किया है या नहीं ? अपने आदेश में जस्टिस अहलूवालिया ने संभागायुक्त सुरेश कुमार द्वारा दिए गए जवाब को नाकाफी पाते यहाँ तक कहा था कि उन्हें (श्री कुमार को) न्यायिक प्रक्रिया का बिलकुल भी ज्ञान नहीं है।  

राज्य सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी

मामले पर मंगलवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रतीप बिसोरिया, अनावेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी व अधिवक्ता विजय झा हाजिर हुए। वहीं राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत से अनुरोध किया कि मुख्य सचिव फिलहाल अवकाश पर हैं, इसलिए जांच पूरी करने के लिए कुछ और समय दिया जाए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए भारी मन से सरकार को एक और मौका दिया है। 

क्या होता है Pandora Box?

'पेंडोरा बॉक्स' का हिंदी में अर्थ "मुसीबतों का पिटारा" या "भानुमती का पिटारा" होता है। यह एक ग्रीक पौराणिक कथा पर आधारित मुहावरा है, जिसका अर्थ है- ऐसा कोई कार्य करना या कुछ ऐसा शुरू करना जिससे न चाहते हुए भी कई अनपेक्षित और गंभीर समस्याएं या दुर्भाग्य पैदा हो जाएं।


हाईकोर्ट का आदेश देखें  CR-175-2024

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