LAW'S VERDICT

दुबई में रह रहे सतीश सनपाल की याचिकाओं पर सरकार ने की आपत्ति

पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिए दाखिल याचिकाओं पर सरकार का ऐतराज,  5 एफआईआर निरस्त करने को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई 23 मार्च को

जबलपुर। दुबई में रह रहे कारोबारी सतीश सनपाल द्वारा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दायर की गई याचिकाओं पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई है। सनपाल ने जबलपुर के तीन अलग-अलग थानों में दर्ज पांच एफआईआर को निरस्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में पांच पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की हैं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सभी मामलों को आपस में लिंक करते हुए 23 मार्च को अगली सुनवाई तय की है।

मामले की सुनवाई जस्टिस बी.पी. शर्मा की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि ये याचिकाएं पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दायर की गई हैं, इसलिए इनकी सुनवाई योग्यता पर सवाल उठता है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सभी पांचों याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करते हुए अगली सुनवाई 23 मार्च को तय कर दी।

तीन थानों में दर्ज हैं पांच एफआईआर

याचिकाकर्ता सतीश सनपाल ने अपनी याचिकाओं में कहा है कि वह मार्च 2020 से दुबई में रह रहा है और तब से भारत नहीं आया है। इसके बावजूद उसकी अनुपस्थिति में उसके खिलाफ जबलपुर के तीन अलग-अलग थानों में पांच आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिए गए

रिकॉर्ड के अनुसार ओमती थाना में उसके खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि सिविल लाइन्स थाना और मदन महल थाना में एक-एक एफआईआर दर्ज है। इन सभी मामलों को निरस्त करने की मांग करते हुए सनपाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बदनाम करने के उद्देश्य से दर्ज हुए केस: सनपाल 

सनपाल की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया है कि वह दुबई में अपना व्यापार कर रहा है और पिछले कई वर्षों से भारत नहीं आया है। उसके अनुसार उसकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर उसे बदनाम करने की नीयत से झूठे मामले दर्ज कराए गए हैं

याचिकाओं में अदालत से यह भी कहा गया है कि जब आरोपों से संबंधित घटनाओं के समय वह भारत में ही मौजूद नहीं था, तो उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत से इन सभी आपराधिक मामलों को रद्द करने की मांग की गई है।

पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिए दायर याचिकाओं पर आपत्ति

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि इससे पहले दायर एक अन्य याचिका में हाईकोर्ट ने सतीश सनपाल को स्वयं का हलफनामा और वकालतनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि वर्तमान में दाखिल चार अन्य याचिकाएं भी पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दायर की गई हैं, इसलिए इनकी सुनवाई योग्यता पर गंभीर प्रश्न खड़ा होता है। राज्य सरकार का कहना है कि जब याचिकाकर्ता स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित होकर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर रहा, तब ऐसी याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने रखे तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान सतीश सनपाल की ओर से अधिवक्ता महेन्द्र पटेरिया उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि सनपाल फिलहाल दुबई में रह रहा है और वहां अपना व्यवसाय संचालित कर रहा है।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने कानून के तहत पॉवर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से याचिकाएं दायर की हैं, ताकि अदालत में अपने खिलाफ दर्ज मामलों को चुनौती दी जा सके। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सभी एफआईआर को तथ्यों के आधार पर परखा जाए और यदि उनमें प्रथम दृष्टया कोई अपराध सिद्ध नहीं होता है तो उन्हें निरस्त किया जाए।

हाईकोर्ट ने सभी मामलों को किया लिंक

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बी.पी. शर्मा की सिंगल बेंच ने आदेश दिया कि सनपाल द्वारा दायर सभी पांच याचिकाओं को आपस में लिंक कर एक साथ सुना जाएगा। अदालत ने कहा कि इन मामलों में उठाए गए कानूनी प्रश्न लगभग समान हैं, इसलिए सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करना उचित होगा। इसके साथ ही अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 23 मार्च निर्धारित कर दी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें  MCRC-11700-2026

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