मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में बंद पूर्व आरक्षक की याचिका खारिज, हाईकोर्ट बोला- बीमारी में कोई इमरजेंसी नहीं
जबलपुर। करोड़ों रुपये की नकदी, सोना और चांदी की बरामदगी से जुड़े चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार परिवहन विभाग के बर्खास्त आरक्षक सौरभ शर्मा को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पत्नी की सर्जरी कराने और देखभाल का हवाला देकर मांगी गई 60 दिनों की अंतरिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस विशाल मिश्रा की वेकेशन बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध मेडिकल दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी की पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति आपातकालीन है। अदालत ने यह भी माना कि उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य मौजूद हैं, इसलिए अंतरिम जमानत देने का कोई विशेष आधार नहीं बनता।
पत्नी के इलाज का दिया था हवाला
सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी पत्नी दिव्या तिवारी क्रॉनिक राइनोसिनुसाइटिस और माइग्रेन जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। चिकित्सकों ने उन्हें साइनस सर्जरी कराने की सलाह दी है। याचिका में दावा किया गया था कि घर में उनकी देखभाल करने वाला कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य नहीं है, इसलिए उन्हें 60 दिनों की अस्थाई जमानत दी जाए।
ईडी ने किया कड़ा विरोध
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार बीमारी गंभीर या जानलेवा नहीं है। ईडी ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी का यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है कि पत्नी की देखभाल के लिए घर में कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं है। परिवार के अन्य सदस्य और ससुराल पक्ष के लोग उनकी देखभाल के लिए उपलब्ध हैं।
करोड़ों की बरामदगी से जुड़ा है मामला
सौरभ शर्मा के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज है। 17 दिसंबर 2024 को हुई छापेमारी में उसके ठिकानों से करोड़ों रुपये नकद और करीब दो क्विंटल चांदी की सिल्लियां बरामद हुई थीं। इसके अलावा उसके एक करीबी की कार से 54 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये से अधिक नकदी मिलने का दावा जांच एजेंसियों ने किया था।
इस मामले की जांच ईडी, आयकर विभाग, लोकायुक्त, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस और ग्वालियर पुलिस सहित कई एजेंसियां कर रही हैं।
पहले खारिज हो चुकी है जमानत
सौरभ शर्मा को 10 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। उसकी नियमित जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके बाद उसने पत्नी के इलाज को आधार बनाकर अंतरिम जमानत की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे भी स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-18875-2026
