LAW'S VERDICT

Pipariya-Bankhedi ROB Case: अंडरपास नहीं बनाने पर हाईकोर्ट ने माँगा जवाब

हाईकोर्ट में अब 15 जून को होगी अगली सुनवाई 

जबलपुर। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया-बनखेड़ी मार्ग पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के नीचे अंडरपास नहीं बनाए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा और अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की है। सोमवार को मामले की सुनवाई जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस दीपक खोत की वेकेशन बेंच ने की।

क्या है पूरा मामला?

बनखेड़ी के व्यापारी धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और आयुष अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि पिपरिया-बनखेड़ी रेलवे लाइन पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज के कारण पुल के दोनों ओर स्थित गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।

याचिका के अनुसार, चांदोन रोड से रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए वर्षों से एक प्रमुख सड़क मार्ग मौजूद था। लेकिन रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के दौरान इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अंडरपास बनाने की मांग

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है कि रेलवे ओवरब्रिज के नीचे एक अंडरपास बनाने के निर्देश संबंधित विभागों और अधिकारियों को दिए जाएं। उनका कहना है कि अंडरपास बनने से पुल के दोनों ओर रहने वाले लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी बनी रहेगी।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस संबंध में प्रशासन और सक्षम अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मजबूर होकर जनहित याचिका दायर करनी पड़ी।

हाईकोर्ट ने सरकार को दी मोहलत

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले पर जवाब प्रस्तुत करने को कहा था। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन उपस्थित हुए।

सरकारी पक्ष द्वारा समय मांगे जाने पर अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए मोहलत प्रदान करते हुए मामले की सुनवाई 15 जून तक स्थगित कर दी।

क्षेत्र के हजारों लोगों पर असर

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेलवे ओवरब्रिज के नीचे अंडरपास नहीं बनाया गया तो आसपास के गांवों के हजारों नागरिकों को लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ेगा। इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अब इस मामले में सभी की नजरें 15 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

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