इटारसी के नर्सिंग छात्रों को फिलहाल राहत देने से इंकार, अब सुनवाई 9 को
जबलपुर। मध्यप्रदेश में बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए छात्रों को फिलहाल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए दो टूक कहा कि सिर्फ छात्रों के भविष्य की चिंता ही नहीं, बल्कि उन मरीजों की भी चिंता होनी चाहिए जिनका इलाज ये छात्र आगे चलकर करेंगे। इटारसी के कुछ नर्सिंग छात्रों को फिलहाल राहत देने से इंकार करके बेंच ने 9 अप्रैल को मामले पर आगे सुनवाई करने कहा है।
पूरे प्रदेश से जुड़ा है नर्सिंग फर्जीवाड़ा
प्रदेश में कई नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन को लेकर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। इस पूरे मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट ने पहले ही Central Bureau of Investigation (CBI) जांच के आदेश दिए थे। लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की याचिका में आरोप हैं कि कई कॉलेज अयोग्य (Unrecognized) थे। फिर भी छात्रों ने बिना नियमित पढ़ाई के प्रवेश लिया और वहां मानकों का पालन किए बिना डिग्री दी जा रही थी।
छात्रों ने मांगी राहत
इटारसी के कुछ छात्रों ने अदालत में अर्जी लगाई कि उन्होंने 4 साल पहले अयोग्य कॉलेजों में एडमिशन लिया। अब उन्हें योग्य कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाए। वे SC/ST/OBC वर्ग से हैं, इसलिए दूसरे शहर नहीं जा सकते। अब दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर न होने से उनका करियर प्रभावित हो रहा है।
हाईकोर्ट ने की तल्ख़ टिप्पणी
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बेहद तल्ख शब्दों में कहा- “आपको उन छात्रों की चिंता है… यह भी सोचिए कि डिग्री लेने के बाद ये क्या करेंगे। बिना पढ़ाई किए ये मरीजों की जिंदगी से खेलेंगे।” कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि
- क्या बिना पढ़ाई के डिग्री देना सही है?
- क्या ऐसे छात्र मरीजों का सुरक्षित इलाज कर पाएंगे?
- क्या यह सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं है?
फिलहाल राहत क्यों नहीं?
कोर्ट ने माना कि मामला केवल छात्रों के करियर का नहीं है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए डिवीजन बेंच ने छात्रों को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया और मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई तय की।
